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The name of TMC MP Sayoni Ghosh who said
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उथल-पुथल के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद सयानी घोष एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। टीएमसी के 19 सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजे गए पत्र में सयानी घोष के हस्ताक्षर भी शामिल है। इस पत्र में संसद में अलग बैठने की व्यवस्था और संसदीय दल में नए नेतृत्व की मांग की गई है।
जादवपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करने वाली सयानी घोष टीएमसी की प्रमुख युवा चेहरों में गिनी जाती हैं। संसदीय दल में संभावित बिखराव की खबरों के बीच उनका नाम सामने आने को पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पत्र में उनके हस्ताक्षर की पुष्टि होती है, तो यह टीएमसी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि का बड़ा संकेत होगा।
सयानी घोष बंगाली मनोरंजन जगत का चर्चित चेहरा रही हैं। अभिनेत्री और गायिका के रूप में पहचान बनाने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और टीएमसी से जुड़कर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाई। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने जादवपुर सीट से जीत दर्ज की थी।
सयानी घोष पहले भी अपने बयानों और चुनावी अभियानों को लेकर सुर्खियों में रही हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान उनके एक चुनावी गीत को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था, जिस पर विपक्षी दलों ने टीएमसी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को निशाने पर लिया था।
इसके अलावा, एक चुनावी सभा में दिया गया उनका बयान, “मैं चड्ढा नहीं हूं जो चड्डी बन जाऊंगी, घोष हमेशा घोष ही रहेगा” भी काफी चर्चा में रहा था और भाजपा नेताओं ने इसकी आलोचना की थी।
बताया जा रहा है कि लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में टीएमसी संसदीय दल के नेतृत्व में बदलाव का प्रस्ताव भी रखा गया है। पत्र में काकोली घोष दस्तीदार को संसदीय दल का नेता बनाए जाने की मांग की गई है। पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में कई वरिष्ठ और चर्चित नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
टीएमसी विधायक दल में पहले से चल रही खींचतान के बीच अब संसदीय दल में भी असंतोष की खबरों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। विशेष रूप से सयानी घोष जैसे लोकप्रिय और युवा चेहरे का नाम सामने आने से राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर टीएमसी नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।