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Train traffic in Raipur-Durg in disarray... Azad Hind Express delayed by 10 hours and Chhattisgarh Express by 8 hours; passengers on the Haridwar-Kamakhya route also facing difficulties.
रायपुर। रायपुर और दुर्ग से ट्रेन से सफर करने वाले यात्रियों की परेशानी लगातार बढ रही है। सोमवार को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर और दुर्ग स्टेशन से गुजरने वाली कई एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और मेमू ट्रेनें तय समय से कई घंटे पीछे चलीं। बिलासपुर और नागपुर दोनों रेल मार्गों पर लंबी देरी का असर दैनिक यात्रियों से लेकर लंबी दूरी के यात्रियों तक पर पडा। कई ट्रेनों के घंटों लेट होने से स्टेशनों पर इंतजार बढा और प्लेटफार्म पर भीड की स्थिति बनी रही।दूसरी ओर, कई प्रमुख शहरों के लिए सीधी ट्रेन नहीं होने और उपलब्ध ट्रेनों में लंबी वेटिंग के कारण यात्रियों को टिकट की समस्या भी झेलनी पड रही है। इसी को देखते हुए दुर्ग सांसद विजय बघेल ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजकर नई ट्रेनों की मांग के साथ मौजूदा सेवाओं को नियमित और विस्तारित करने का प्रस्ताव रखा है।
रायपुर-बिलासपुर मार्ग पर सोमवार को कई ट्रेनों का शेड्यूल बुरी तरह प्रभावित रहा। आजाद हिंद एक्सप्रेस सबसे ज्यादा देरी से चली। इसे दोपहर 2.40 बजे रवाना होना था, लेकिन ट्रेन रात 12.59 बजे रवाना हुई। यानी यात्रियों को करीब 10 घंटे का इंतजार करना पडा।छत्तीसगढ एक्सप्रेस भी सुबह 8.35 बजे के निर्धारित समय के बजाय शाम 5.11 बजे रवाना हुई। यह ट्रेन भी आठ घंटे से ज्यादा देर से चली।मेमू ट्रेनों की स्थिति भी बेहतर नहीं रही। गोंदिया-झारसुगुडा मेमू को सुबह 9.20 बजे के बजाय 11.07 बजे रवाना किया गया। डोंगरगढ-बिलासपुर मेमू भी एक घंटे से अधिक देरी से चली। शिवनाथ एक्सप्रेस सुबह 5.05 बजे के बजाय 6.51 बजे रवाना हुई, जबकि बिलासपुर इंटरसिटी दोपहर 12.18 बजे की जगह 1.04 बजे चली।
रायपुर-नागपुर मार्ग पर भी कई प्रमुख ट्रेनें निर्धारित समय से काफी पीछे रहीं। पोरबंदर कवि गुरु एक्सप्रेस सुबह 11 बजे के बजाय शाम 7.07 बजे रायपुर पहुंची। मुंबई एलटीटी कर्मभूमि एक्सप्रेस रात 2.55 बजे की जगह सुबह 10.15 बजे पहुंची।एर्नाकुलम सुपरफास्ट एक्सप्रेस भी सुबह 9.55 बजे के निर्धारित समय के बजाय शाम 5.42 बजे पहुंची। दोनों ट्रेनों में करीब सात घंटे की देरी रही।मुंबई सीएसएमटी एसी दुरंतो, नई दिल्ली राजधानी, अहमदाबाद सुपरफास्ट, हावडा-मुंबई सीएसएमटी, ज्ञानेश्वरी और मुंबई एलटीटी एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हुआ।
ट्रेनों के अचानक कई घंटे पीछे चलने का सीधा असर यात्रियों पर पड रहा है। नौकरीपेशा और दैनिक यात्री समय पर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले परिवारों को भी स्टेशन पर अतिरिक्त समय गुजारना पड रहा है।ट्रेन के समय में बडे बदलाव की स्थिति में यात्रियों के लिए सबसे बडी परेशानी सही और समय पर सूचना की होती है। लंबा इंतजार होने से प्लेटफार्म पर भीड बढती है और यात्रियों को आगे की यात्रा की योजना बनाने में मुश्किल होती है।
रायपुर और दुर्ग से कई प्रमुख शहरों के लिए ट्रेन कनेक्टिविटी होने के बावजूद कुछ महत्वपूर्ण रूट अब भी सीधे विकल्प से वंचित हैं। हरिद्वार इसका प्रमुख उदाहरण है। दुर्ग और रायपुर से हरिद्वार के लिए सीधी नियमित ट्रेन नहीं होने के कारण यात्रियों को पहले बिलासपुर जाना पडता है। वहां से उत्कल एक्सप्रेस पकडकर हरिद्वार की यात्रा करनी होती है।यात्रियों के मुताबिक दुर्ग से बिलासपुर पहुंचने में करीब दो घंटे लग जाते हैं। इसके बाद ट्रेन बदलने के लिए अतिरिक्त समय और स्थानीय परिवहन का खर्च भी जुड जाता है। परिवार के साथ यात्रा करने वाले लोगों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह व्यवस्था ज्यादा कठिन हो जाती है।
कामाख्या जाने वाले यात्रियों के लिए भी स्थिति आसान नहीं है। कर्मभूमि एक्सप्रेस प्रमुख विकल्प है, लेकिन यह साप्ताहिक ट्रेन होने के कारण इसमें मांग काफी ज्यादा है। वर्तमान स्थिति में स्लीपर और एसी दोनों श्रेणियों में नो-रूम की स्थिति है।वाराणसी जाने वाली ट्रेनों में भी लंबी वेटिंग चल रही है। सारनाथ और गोंदिया-बरौनी जैसी ट्रेनों पर यात्रियों का दबाव बना हुआ है। दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस सप्ताह में तीन दिन चलती है, लेकिन इसमें भी कंफर्म टिकट के लिए यात्रियों को लंबी वेटिंग का सामना करना पड रहा है।
रायपुर और दुर्ग मुंबई-हावडा रेल कॉरिडोर के अहम स्टेशन हैं। मुंबई की ओर जाने वाली ट्रेनों में लगातार यात्री दबाव रहता है। मांग अधिक होने के कारण सीटें जल्दी भर जाती हैं और कंफर्म टिकट मिलना मुश्किल हो जाता है।यात्रियों का कहना है कि नई ट्रेनें शुरू होने या मौजूदा ट्रेनों का विस्तार किए जाने से दबाव कुछ कम किया जा सकता है। इससे यात्रियों को यात्रा की तारीख और ट्रेन चुनने के अधिक विकल्प मिलेंगे।
यात्रियों की परेशानी को देखते हुए दुर्ग सांसद विजय बघेल ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजकर कई नई सेवाएं शुरू करने और मौजूदा ट्रेनों को नियमित करने की मांग की है।प्रस्ताव में दुर्ग-हरिद्वार स्पेशल और दुर्ग-सुल्तानपुर स्पेशल को नियमित करने की मांग शामिल है। दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस को सप्ताह में तीन दिन के बजाय रोज चलाने का प्रस्ताव भी दिया गया है।इसके अलावा दुर्ग-अमृतसर ट्रेन, दुर्ग-बनारस वंदे भारत और कामाख्या-दुर्ग अमृत भारत एक्सप्रेस शुरू करने की मांग की गई है। दुर्ग-अंबिकापुर इंटरसिटी और कोरबा-रायपुर इंटरसिटी को दुर्ग तक बढाने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
रेलवे के सामने नई ट्रेन शुरू करने का प्रस्ताव आने के बाद कई स्तर पर जांच होती है। सबसे पहले संबंधित रूट की लाइन क्षमता और उपलब्ध टाइम स्लॉट देखा जाता है। इसके बाद ट्रेन के लिए रैक और कोच, पिट लाइन, मेंटेनेंस सुविधा तथा लोको पायलट और अन्य कर्मचारियों की उपलब्धता का आकलन किया जाता है।इसके साथ ट्रैक, सिग्नल और इलेक्ट्रिक सिस्टम की क्षमता तथा संबंधित रूट पर यात्रियों की वास्तविक मांग भी देखी जाती है। इन सभी पहलुओं की रिपोर्ट मिलने के बाद ही प्रस्ताव पर आगे निर्णय लिया जाता है।बिलासपुर मुख्यालय के सीपीआरओ शेख समी उर रहमान के मुताबिक सांसद की ओर से रखी गई मांगों का संबंधित विभागों द्वारा विस्तृत परीक्षण किया जाता है। मांग की व्यावहारिकता, यात्री सुविधा और अन्य जरूरी पहलुओं का आकलन करने के बाद निर्णय लिया जाता है।
यदि प्रस्तावित सेवाओं को मंजूरी मिलती है तो हरिद्वार, अमृतसर, वाराणसी, कामाख्या और नौतनवा जैसे रूट पर यात्रियों को अतिरिक्त विकल्प मिल सकते हैं। दुर्ग-नौतनवा सेवा रोज होने से टिकट उपलब्धता में सुधार की उम्मीद होगी। कामाख्या के लिए नई अमृत भारत सेवा शुरू होने पर साप्ताहिक कर्मभूमि एक्सप्रेस पर निर्भरता घट सकती है।इसी तरह दुर्ग-अंबिकापुर और कोरबा-रायपुर इंटरसिटी को दुर्ग तक बढाने से छत्तीसगढ के भीतर भी सीधी रेल कनेक्टिविटी मजबूत हो सकती है। हालांकि इन प्रस्तावों को लागू करने से पहले रेलवे को परिचालन क्षमता और संसाधनों से जुडे सभी पहलुओं की जांच करनी होगी।