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Tribute to martyred workers on the 34th anniversary of the Dalli-Rajhara firing incident.
दुर्ग। दल्ली-राजहरा गोलीकांड की बरसी पर बुधवार को छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (छमुमो) ने शहीद मजदूरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए रैली और आमसभा का आयोजन किया। संगठन ने 1 जुलाई 1992 को पुलिस फायरिंग में शहीद हुए 17 मजदूरों को याद करते हुए श्रमिक अधिकारों की रक्षा और श्रम कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग उठाई।

छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष भीमराव बागड़े ने कहा कि 1 जुलाई 1992 को मजदूर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे, लेकिन उनकी मांगें पूरी करने के बजाय पुलिस फायरिंग की गई, जिसमें 17 मजदूर शहीद हो गए। उन्होंने कहा कि हर वर्ष शहीदों की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है।

बागड़े ने बताया कि कार्यक्रम के तहत शहीद परिवारों के साथ गोलीकांड स्थल पर पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद पावर हाउस से रैली निकाली गई, जो छावनी चौक पहुंची। यहां श्रमिक नेता शंकर गुहा नियोगी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया और बाद में आमसभा आयोजित हुई।
उन्होंने कहा कि मजदूरों की प्रमुख मांगों में जीने लायक वेतन, हाजिरी पत्रक, वेतन पर्ची, न्यूनतम वेतन और श्रम कानूनों का पालन शामिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि श्रम कानूनों में किए गए बदलावों से मजदूरों के अधिकार कमजोर हुए हैं। उनका कहना था कि आठ घंटे की ड्यूटी के सिद्धांत को प्रभावित किया गया है और कर्मचारी भविष्य निधि (पीएफ) से जुड़े निरीक्षण नियमों में बदलाव के कारण कार्रवाई की प्रक्रिया जटिल हो गई है।
बागड़े ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने श्रम निरीक्षकों के जांच संबंधी अधिकार सीमित कर दिए हैं, जिससे श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर असर पड़ा है।
सभा में पूर्व विधायक जनकलाल ठाकुर, श्रमिक नेता भुवन साहू, एक्टू के राष्ट्रीय सचिव बृजेंद्र तिवारी, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के उपाध्यक्ष ए.जी. कुरैशी सहित शहीद परिवारों के सदस्य और बड़ी संख्या में मजदूर मौजूद रहे।