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Twisha was found hanging, and why was CPR administered? The 14-minute timeline raises questions.
भोपाल। भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में अब जांच का केंद्र मौत वाली रात की टाइमलाइन बन गई है। पुलिस की केस डायरी और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सामने आए घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, गिरिबाला सिंह ने बयान में कहा है कि उन्होंने रात 10:50 बजे ट्विशा को छत पर फंदे से लटका देखा था। इसके तीन मिनट बाद, 10:53 बजे ट्विशा की मां का फोन आने पर गिरिबाला ने कथित तौर पर कहा, “She is no more” यानी “वह नहीं रही”।
लेकिन मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि इसके ठीक 14 मिनट बाद, रात 11:07 बजे सीसीटीवी फुटेज में तीन लोग ट्विशा को सीपीआर देते दिखाई दे रहे हैं। इसी विरोधाभास को सीबीआई अब जांच का सबसे अहम बिंदु मान रही है।
सीसीटीवी फुटेज और 40 मिनट की गतिविधियों पर फोकस
सीबीआई घर के भीतर और टेरेस पर हुई गतिविधियों की बारीकी से जांच कर रही है। एजेंसी विशेष रूप से उन करीब 40 मिनट की घटनाओं को जोड़ने की कोशिश कर रही है, जो घर के सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई हैं।
कटारा हिल्स पुलिस ने पहले ही घर के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर विस्तृत टाइमलाइन तैयार की थी। जांच में यह भी सामने आया कि कैमरों में रिकॉर्ड समय और वास्तविक समय में अंतर था। इसके बाद पुलिस ने वास्तविक समय के अनुसार पूरे घटनाक्रम को दोबारा तैयार किया और लगभग 500 पन्नों की केस डायरी सीबीआई को सौंप दी।
समर्थ सिंह सीबीआई कस्टडी में
मामले में एक अन्य अहम घटनाक्रम के तहत भोपाल की अदालत ने समर्थ सिंह को बुधवार को सीबीआई की कस्टडी में भेज दिया। इसके बाद सीबीआई टीम उन्हें लेकर घर भी पहुंची, जहां घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। जांच एजेंसी अब डिजिटल सबूतों, कॉल रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज को मिलाकर घटनाओं की सटीक कड़ी जोड़ने में जुटी है।
गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित
उधर, गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने निचली अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि केस डायरी और डिजिटल सबूतों की पर्याप्त अनदेखी की गई है। हाई कोर्ट ने मामले में सीबीआई को भी पक्षकार बनाने के निर्देश दिए और एजेंसी से शपथ पत्र दाखिल करने को कहा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
जांच में अब टाइमलाइन सबसे अहम कड़ी
सीबीआई के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि 10:53 बजे ट्विशा को मृत घोषित किया जा चुका था, तो 11:07 बजे सीपीआर क्यों और किन परिस्थितियों में दिया जा रहा था। एजेंसी इसी सवाल के आधार पर मौत वाली रात की पूरी टाइमलाइन को दोबारा खंगाल रही है।