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Unseasonal rain and storms in Arang have ruined the hard work of farmers; the paddy crop has been destroyed, and demands for a complete loan waiver are now intensifying.
आरंग। आरंग क्षेत्र में आए तूफान और लगातार हुई बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। कटाई के लिए तैयार खड़ी धान की फसल खेतों में गिरकर बिछ गई है। वहीं, जिन किसानों ने फसल काटकर खेतों में सुखाने के लिए रखी थी, उनकी उपज भी बारिश में पूरी तरह भीग गई है। प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।बारिश से भीगी कटी हुई फसल में लगातार नमी बने रहने के कारण उसके सड़ने, दानों का रंग बदलने और फफूंद लगने का खतरा बढ़ गया है। दूसरी ओर, तेज हवा के झोंकों से पककर तैयार खड़ी फसल खेतों में गिर गई है। कई इलाकों में स्वर्ण वैरायटी का धान पानी में डूब गया है। किसानों के अनुसार, इस किस्म की फसल को 75 से 90 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है। कई जगह स्थिति ऐसी है कि अब फसल की कटाई करना भी मुश्किल हो गया है।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, बारिश में भीगने से धान के दानों की चमक प्रभावित हो सकती है। ऐसी उपज के लिए मंडियों में फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) के निर्धारित मानकों पर खरा उतरना चुनौतीपूर्ण होगा। व्यापारी नमी का हवाला देकर उपज की कीमत कम कर सकते हैं। इससे किसानों को अपनी फसल औने-पौने दाम पर बेचने की मजबूरी हो सकती है।खेतों में गिर चुकी फसल की मशीनों से कटाई करना भी लगभग असंभव हो गया है। इसके चलते प्रति एकड़ उत्पादन में 30 से 50 प्रतिशत तक गिरावट की आशंका जताई जा रही है। ऐसे हालात में किसानों के लिए खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है।
किसान नेता और जिला पंचायत सदस्य पारसनाथ साहू तथा वतन चंद्राकर ने कहा कि पिछले महीने आई बाढ़ और भारी बारिश से भी कई खेत जलमग्न हुए थे। उस समय शासन ने सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक अधिकांश प्रभावित क्षेत्रों में न तो सर्वे पूरा हुआ है और न ही किसानों को राहत राशि मिली है।दोनों किसान नेताओं ने मांग की है कि मौजूदा नुकसान का आकलन करने के लिए प्रभावित गांवों में तत्काल विशेष सर्वेक्षण कराया जाए। किसानों को प्रति एकड़ के आधार पर उचित मुआवजा दिया जाए।
कम नुकसान वाली फसलों के लिए राजस्व परिपत्र 6-4 के तहत राहत उपलब्ध कराई जाए, जबकि बड़े पैमाने पर हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार से विशेष आर्थिक पैकेज मांगा जाए।उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में आने वाले प्रभावित रकबे के लिए शत-प्रतिशत मुआवजा देने की मांग भी रखी है। किसान नेताओं का कहना है कि इस प्राकृतिक आपदा से किसानों को उबारने के लिए उनका संपूर्ण कर्ज माफ किया जाना चाहिए।इसके अलावा, जिन इलाकों में फिलहाल सिंचाई के पानी की जरूरत नहीं है, वहां नहरों से की जा रही जलापूर्ति तत्काल बंद करने की मांग की गई है, ताकि खेतों में पहले से जमा पानी और नुकसान न बढ़ाए।