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We will not allow any conspiracy to dismantle the settlement of Bhilai: Devendra Yadav.
भिलाई। भिलाई टाउनशिप के लाइसेंस आवासों के रिन्यूअल पर रोक, रिटेंशन आवासों के पेनल रेंट और अन्य आवासीय समस्याओं को लेकर विधायक देवेंद्र यादव ने मंगलवार को अपने कार्यालय में प्रेस वार्ता की। उन्होंने आरोप लगाया कि भिलाई टाउनशिप की बसाहट को खत्म करने की साजिश रची जा रही है और बड़ी संख्या में लोगों को मकान खाली करने के नोटिस भेजे जा रहे हैं।
देवेंद्र यादव ने कहा कि भिलाई टाउनशिप में जितने भी लाइसेंस मकान हैं, उन पर एक-एक कर नोटिस जारी किए जा रहे हैं। वहीं, लीजधारी परिवारों का रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है और रिटेंशन स्कीम से जुड़े लोगों की समस्याओं का भी अब तक समाधान नहीं निकला है। इससे भिलाईवासियों में भय और असमंजस का माहौल है।
उन्होंने कहा कि लोगों के बीच यह चर्चा है कि टाउनशिप के बड़े हिस्से को खाली कराकर किसी निजी बिल्डर या निजी संस्था को सौंपने की तैयारी की जा रही है। इस तरह की चर्चाओं से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है।
विधायक ने कहा कि भिलाई सत्याग्रह आंदोलन के दौरान छह महीने पहले BSP प्रबंधन ने जिला प्रशासन की मौजूदगी में आश्वासन दिया था कि टाउनशिप को लेकर बनाई जा रही योजनाओं की पूरी जानकारी प्रशासन को दी जाएगी और प्रशासन की सहमति के बाद ही आगे बढ़ा जाएगा। लेकिन वर्तमान में जिस तरह मकान खाली कराने के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं, उससे साफ है कि भिलाई की बसाहट को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है।
देवेंद्र यादव ने स्पष्ट कहा कि भिलाई के लोगों का पूरा जीवन इस शहर में बीता है और वे किसी भी कीमत पर इसकी बसाहट खत्म नहीं होने देंगे। उन्होंने मांग की कि जो लोग वर्षों से टाउनशिप में रह रहे हैं, उन्हें यथावत वहीं रहने दिया जाए और उन्हें मकानों से बेदखल न किया जाए।
उन्होंने बताया कि 10 हजार से अधिक परिवार इस पूरे मामले से प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में कांग्रेस हर नोटिस प्राप्त परिवार के घर जाएगी, उनका समर्थन जुटाएगी और इसके बाद भिलाई में एक व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
निजीकरण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि BSP प्रबंधन को गांधीवादी तरीके से समझाने का प्रयास किया जाएगा कि वे लोगों के जीवन और शहर को उजाड़ने का प्रयास न करें। उन्होंने कहा, “अडानी को दें या अंबानी को दें, लेकिन हम अपना शहर किसी को नहीं देने देंगे। यह भिलाईवासियों की जगह है।”
सांसद और पूर्व मंत्री के प्रयासों पर उन्होंने कहा कि वे अपनी तरफ से कोशिश कर रहे हैं, लेकिन केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार की नीतियां निजीकरण को बढ़ावा देने वाली हैं। ऐसे में पब्लिक सेक्टर यूनिट्स को बचाने की दिशा में ठोस सफलता मिलना मुश्किल है। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से भिलाई की संस्कृति और शहर को बचाने के लिए एकजुट होने की अपील की।