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Whose is the 4 crore found in Khursipar? Two firms staked a claim, but could not provide proof.
भिलाई। खुर्सीपार में वाहन से बरामद 4 करोड़ रुपये की नकदी के मालिकाना हक को लेकर विवाद गहरा गया है। रकम पर दो अलग-अलग पक्षों ने दावा किया, लेकिन दोनों ही अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं कर सके। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में वाहन में सवार लोगों ने नकदी को ट्रांसपोर्ट कारोबार से जुड़ा बताया था। बाद में अदालत में मेसर्स मेक टेक फर्म ने इसे अपनी वैध कमाई करार देते हुए वापस मांगा।वाहन में मौजूद दोनों लोगों ने शपथपत्र देकर कहा कि वे कमलेश शाह के निर्देश पर रकम रायपुर से नागपुर ले जा रहे थे। हालांकि, वे मेक टेक फर्म से जुड़े कर्मचारी या अधिकृत प्रतिनिधि हैं, इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया जा सका। दावों में विरोधाभास और आयकर विभाग की जांच को देखते हुए अदालत ने नकदी की सुपुर्दगी के लिए दायर याचिका खारिज कर दी।अब भी यह सवाल बना हुआ है कि 4 करोड़ रुपये वास्तव में किसके थे और इतनी बड़ी नकदी रायपुर से नागपुर क्यों भेजी जा रही थी।
25 अक्टूबर की रात खुर्सीपार पुलिस ने रायपुर-दुर्ग मार्ग पर रायपुर की ओर से आ रहे नेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के वाहन क्रमांक सीजी 04 क्यूयू 5996 को रोककर तलाशी ली थी। वाहन में 500, 200 और 100 रुपये के नोटों के बंडल मिले, जिनकी कुल कीमत 4 करोड़ रुपये थी।वाहन में भावेश भाई डाभी और विष्णुदेव दुबे सवार थे। शुरुआती पूछताछ में दोनों ने रकम को जट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन और धनपुरी के जयश्री गोल्डन मार्केट से जुड़े ट्रांसपोर्ट कारोबार का हिस्सा बताया था। संतोषजनक दस्तावेज नहीं मिलने पर पुलिस ने बीएनएस की धारा 106 के तहत नकदी और वाहन जब्त कर लिया था।
इस मामले में आयकर विभाग ने 29 अक्टूबर को अदालत को पत्र भेजा था। विभाग ने अनुरोध किया था कि उसकी जांच पूरी होने तक जब्त नकदी किसी भी पक्ष को न सौंपी जाए। विभाग की आपत्ति भी रकम की सुपुर्दगी संबंधी याचिका पर विचार के दौरान सामने रही।
जब्त नकदी वापस लेने के लिए कमलेश आर. शाह और उनकी बेटियों खुशबू शाह तथा खुशाली शाह ने अधिवक्ता राकेश पुरी के माध्यम से अदालत में आवेदन पेश किया। उन्होंने दावा किया कि 4 करोड़ रुपये उनकी कृषि आधारित व्यावसायिक फर्म मेसर्स मेक टेक की वैध कमाई हैं।हालांकि, रकम पर दावा करने के बावजूद फर्म और वाहन में सवार लोगों के बीच संबंध साबित करने वाले पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं किए जा सके। इसी वजह से अदालत ने नकदी की सुपुर्दगी की मांग स्वीकार नहीं की। फिलहाल रकम का वास्तविक मालिक और उसके स्रोत को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।