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World record-holding 'Kamdhenu' cow 'Saumya' merges with the five elements; thousands of devotees pay tribute after viewing her mortal remains.
खैरागढ़। खैरागढ़ स्थित मनोहर गौशाला की विश्व रिकॉर्डधारी कामधेनु माता 'सौम्या' का शुक्रवार 2:27 बजे लगभग 23 वर्ष की आयु में संथारापूर्वक देवलोक गमन हो गया। अंतिम समय में उन्होंने प्रभु वाणी, णमोकार मंत्र और भक्तामर स्तोत्र का श्रवण करते हुए शांत भाव से देह त्याग किया। उनके निधन से श्रद्धालुओं और गौभक्तों में शोक की लहर है।
दोपहर में मनोहर गौशाला से उनकी समाधि यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। इसके बाद जीरावला मनोहर जीवदया धाम में वैदिक एवं जैन परंपरा के अनुसार विधि-विधान से उन्हें समाधि दी गई।
खैरागढ़ स्थित मनोहर गौशाला में वर्ष 2017 में स्थापित कामधेनु मंदिर की प्रमुख आस्था रही सौम्या अपनी 54 इंच लंबी पूंछ के कारण गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुई थीं। इससे पहले सबसे लंबी पूंछ वाली गाय का रिकॉर्ड ब्राजील की 48 इंच पूंछ वाली गाय के नाम था।
गौशाला प्रबंधन के अनुसार, विश्व में इस प्रकार की केवल चार से पांच गायें ही मौजूद हैं। उनकी विशिष्ट शारीरिक बनावट और शरीर पर मौजूद धार्मिक प्रतीक चिह्नों के कारण श्रद्धालु उन्हें साक्षात कामधेनु माता मानते थे।
पिछले करीब आठ वर्षों में 30 हजार से अधिक श्रद्धालु सौम्या के दर्शन के लिए मनोहर गौशाला पहुंचे। उनके जीवनकाल में 142 जैन साधु-साध्वियों तथा अनेक आचार्यों ने उन्हें मांगलिक, णमोकार मंत्र और धार्मिक वाणी का श्रवण कराया। प्रदेश के तीन राज्यपालों, कई संत-महात्माओं और विभिन्न क्षेत्रों की अनेक विशिष्ट हस्तियों ने भी उनके दर्शन किए थे।
गोधन के जानकारों के अनुसार, सौम्या में शास्त्रों में वर्णित कामधेनु के कई लक्षण दिखाई देते थे। उनकी 54 इंच लंबी पूंछ, शरीर पर विशेष प्रतीक चिह्न और अनोखा स्वरूप उन्हें अन्य गायों से अलग पहचान दिलाता था। यही कारण था कि वे वर्षों तक हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनी रहीं।
श्री कमलाबाई कन्हैयालाल चैरिटेबल ट्रस्ट ने सौम्या को जैसलमेर से लाकर खैरागढ़ स्थित मनोहर गौशाला में स्थापित किया था। तब से उनकी निरंतर सेवा की जा रही थी। गौशाला पहले भी स्वच्छता के क्षेत्र में सम्मानित हो चुकी है।
सौम्या को विश्व की सबसे लंबी पूंछ वाली गाय होने के कारण गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड का सम्मान प्रदान किया गया था। यह उपलब्धि न केवल मनोहर गौशाला बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय बनी।
गौशाला के मैनेजिंग ट्रस्टी पदम डाकलिया ने कहा कि सौम्या को मिला यह सम्मान प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने बताया कि गौशाला गौसेवा, संरक्षण और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बनी रहेगी।