

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

You think it, the computer writes it! Meta unveils new AI technology that reads brain signals.
नई दिल्ली। क्या आने वाले समय में केवल सोचने भर से आपकी बात कंप्यूटर की स्क्रीन पर लिखी जा सकेगी? इस सवाल को हकीकत में बदलने की दिशा में टेक दिग्गज मेटा ने बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने 'ब्रेन-टू-क्वर्टी V2' नामक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम विकसित किया है, जो बिना किसी सर्जरी के मस्तिष्क से मिलने वाले संकेतों को समझकर उन्हें लिखित शब्दों में बदलने का दावा करता है। शुरुआती शोध के नतीजों ने इस तकनीक को लेकर वैज्ञानिकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।
अब तक ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस तकनीकों में मस्तिष्क के भीतर इलेक्ट्रोड लगाने जैसी जटिल प्रक्रिया अपनानी पड़ती थी। मेटा का नया सिस्टम इस चुनौती को खत्म करने का प्रयास करता है। यह सिर के बाहर से ही मस्तिष्क की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर उनका विश्लेषण करता है, जिससे भविष्य में सुरक्षित और आसान तकनीक विकसित होने की संभावना बढ़ गई है।
कंपनी के अनुसार इस AI मॉडल को 22 हजार से अधिक वाक्यों के डेटा पर प्रशिक्षित किया गया। इसके लिए नौ स्वयंसेवकों ने विशेष मैग्नेटोएन्सेफेलोग्राफी (MEG) उपकरण पहनकर करीब 10 घंटे तक टाइपिंग की। इस दौरान रिकॉर्ड किए गए मस्तिष्क संकेतों के आधार पर AI ने यह समझना सीखा कि अलग-अलग विचार किस प्रकार शब्दों में व्यक्त होते हैं।
मेटा का कहना है कि परीक्षण के दौरान सिस्टम ने गैर-सर्जिकल तकनीकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। औसतन 61 प्रतिशत शब्दों की सही पहचान की गई, जबकि कुछ प्रतिभागियों के मामले में यह सटीकता 78 प्रतिशत तक पहुंच गई। कई परीक्षणों में पूरे वाक्य में केवल एक या उससे भी कम शब्द की त्रुटि दर्ज की गई।
इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह मस्तिष्क से प्राप्त कच्चे संकेतों का विश्लेषण करने के लिए डीप लर्निंग और बड़े भाषा मॉडल (LLM) का उपयोग करती है। AI अधूरे या अस्पष्ट संकेतों का संदर्भ समझकर उन्हें अर्थपूर्ण शब्दों और वाक्यों में बदलने का प्रयास करता है।
यदि भविष्य के परीक्षण भी सफल रहते हैं तो यह तकनीक स्ट्रोक, लकवा, मस्तिष्क की गंभीर चोट या अन्य तंत्रिका संबंधी बीमारियों के कारण बोलने की क्षमता खो चुके लोगों के लिए संचार का प्रभावी माध्यम बन सकती है। इससे मरीज केवल सोचकर अपनी बात व्यक्त कर सकेंगे।
हालांकि यह तकनीक अभी अनुसंधान के शुरुआती दौर में है। इसका परीक्षण केवल नौ स्वयंसेवकों पर किया गया है। आम उपयोग या अस्पतालों में इसे अपनाने से पहले व्यापक क्लीनिकल ट्रायल और वैज्ञानिक परीक्षण किए जाएंगे।
मेटा ने घोषणा की है कि वह इस परियोजना से जुड़ा ट्रेनिंग कोड और संबंधित डेटासेट शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराएगी। कंपनी के मुताबिक यह पहल उसके 'डिजिटल ब्रेन प्रोजेक्ट' का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मस्तिष्क संबंधी बीमारियों को बेहतर ढंग से समझना और उनके उपचार के लिए नई तकनीकों का विकास करना है।