

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में गुरुवार को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के निर्णय को पलट दिया। कोर्ट ने मामले के प्रमुख आरोपित अमित जोगी को दोषी करार देते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।
वहीं, फैसले के खिलाफ अमित जोगी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है, जिस पर सोमवार को सुनवाई होने की संभावना है।
2003 में हुई थी सनसनीखेज हत्या
राजधानी रायपुर में 4 जून 2003 को एनसीपी के कोषाध्यक्ष राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह मामला उस समय राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया था।
विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में भाजपा सरकार बनने पर मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी गई।
सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ कि यह हत्या एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी, जिसमें भाड़े के शूटरों का इस्तेमाल किया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि उस समय के कुछ पुलिस अधिकारियों ने साक्ष्य छिपाने और असली आरोपितों को बचाने के लिए झूठे गवाह और फर्जी आरोपित तैयार किए थे।
साल 2007 में विशेष अदालत ने तीन पुलिस अधिकारियों सहित कुल 28 आरोपितों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हालांकि, साक्ष्यों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था।
सीबीआई ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की थी, लेकिन 1,373 दिनों की देरी के कारण यह याचिका खारिज कर दी गई थी। इसके बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि आरोप बेहद गंभीर हैं और यह एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की हत्या की साजिश से जुड़ा मामला है। कोर्ट ने हाई कोर्ट को केस की दोबारा सुनवाई करने का निर्देश दिया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केस रीओपन हुआ और रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया।
अमित जोगी की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता विकास वालिया ने हाई कोर्ट को बताया कि केस रीओपन करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए एसएलपी दायर की गई है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।