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रायपुर: आबकारी विभाग के अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव का नाम हाल ही में ईडी की चार्जशीट में शामिल होने के बावजूद उन्हें अभी तक निलंबित नहीं किया गया है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इस फैसले के पीछे प्रशासनिक मजबूरी और विभागीय संचालन की आवश्यकताएँ हैं।
वर्तमान में विभाग में दो अपर आयुक्त कार्यरत हैं, पीएल साहू और आशीष श्रीवास्तव। पीएल साहू ने हाल ही में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए इंटरव्यू भी दे रखा है। यदि उनका चयन हो जाता है, तो विभाग में केवल एक अपर आयुक्त ही शेष बचेगा।
सूत्रों का कहना है कि अगर आशीष श्रीवास्तव को ईडी की चार्जशीट के आधार पर तुरंत निलंबित कर दिया जाता, तो विभाग बिना अपर आयुक्त के कार्य करने के दबाव में आ सकता था। इस समय विभाग में नई आबकारी इकाई बनाने की प्रक्रिया भी चल रही है। वरिष्ठ अधिकारियों ने यही तर्क शासन के सामने रखा और इस वजह से आशीष के निलंबन को फिलहाल टाल दिया गया।
दूसरी ओर, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अभी तक ईडी की तरफ से विभाग को आधिकारिक पत्राचार नहीं मिला है, जिससे कार्रवाई करना तकनीकी रूप से कठिन हो गया है।
ईडी ने 17 दिन पहले शराब घोटाले की 29,800 पेज की चार्जशीट में आशीष श्रीवास्तव का नाम जोड़ा था। उल्लेखनीय है कि इससे पहले एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की चार्जशीट में उनका नाम शामिल नहीं था। ACB ने इसी साल 7 जुलाई को 29 अफसरों में से 22 कार्यरत अफसरों को निलंबित कर दिया था।
इस मामले में कुछ निलंबित अधिकारियों का आरोप है कि विभाग आशीष श्रीवास्तव को संरक्षण दे रहा है।
विभागीय नियमों की बात करें तो सभी अफसरों पर समान नियम लागू होने चाहिए। इस मुद्दे पर सचिव आर. संगीता और अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
ईडी के एक अधिकारी ने कहा, “चार्जशीट अब सार्वजनिक हो चुकी है। हमने संबंधित अफसरों के खाते सीज कर दिए हैं। विभाग की तरफ से कोई जानकारी मांगने पर आवश्यक विवरण हम उपलब्ध कराएंगे।”