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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक 37 वर्षीय विधवा महिला के साथ तीन युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। हैरान करने वाली बात यह रही कि समाज के ठेकेदारों ने कानून को ताक पर रखकर आरोपियों पर महज आर्थिक दंड लगाकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। अंततः पीड़िता की हिम्मत से मामला पुलिस तक पहुँचा और अब कार्रवाई शुरू हुई है।
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना 22 फरवरी 2026 की रात की है। ग्राम पंचायत के वार्ड पंच रोशन कुमार साहू (24) के घर पर शराब पार्टी चल रही थी। पार्टी से लौटते समय विकास सिन्हा (26) ने गांव के नल के पास महिला को अकेला देखा।
आरोपियों ने दरिंदगी की सारी हदें पार करते हुए महिला को जबरन उठाकर सुनसान स्थान पर ले गए और बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपियों की पहचान विकास सिन्हा (ठेकेदार), कमल कुमार सेन (ड्राइवर) और रोशन कुमार साहू (पंच) के रूप में हुई है।
पीड़िता ने जब इस अत्याचार की शिकायत ग्रामीण प्रमुखों से की, तो न्याय दिलाने के बजाय "कंगारू कोर्ट" सजाकर मामले को दबाने का प्रयास किया गया।
कथित तौर पर ग्राम प्रमुखों ने तीनों आरोपियों से 40-40 हजार रुपये का जुर्माना लेकर मामले को शांत करने का फरमान सुनाया। पीड़िता इस फैसले से संतुष्ट नहीं थी और उसने कानून का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया।
महिला की शिकायत पर बालोद थाने में 13 मार्च को औपचारिक प्राथमिकी दर्ज की गई। एसडीओपी बोनिफास एक्का और एएसपी मोनिका ठाकुर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल टीम गठित की।
एएसपी मोनिका ठाकुर ने बताया "मामला बेहद गंभीर है। हमने दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और तीसरे की तलाश के लिए छापेमारी जारी है। ग्रामीण स्तर पर हुए समझौते के दावों की भी जांच की जा रही है।"
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और SC/ST एक्ट की सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
गिरफ्तार आरोपी विकास सिन्हा और कमल कुमार सेन को शनिवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है। फरार आरोपी और वार्ड पंच रोशन साहू की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। पीड़िता, जो अपने पति के निधन के बाद मायके में रह रही थी, फिलहाल पुलिस सुरक्षा और देखरेख में है।