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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को शर्मसार करने वाली एक बेहद असंवेदनशील तस्वीर सामने आई है। यहाँ एक सड़क दुर्घटना में अपनी जान गंवाने वाले शिक्षक को मौत के बाद भी सम्मानजनक विदाई नसीब नहीं हो सकी। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शव वाहन (मर्च्युरी वैन) उपलब्ध न होने के कारण थक-हारकर परिजनों को उनका शव एक निजी पिकअप वाहन में लादकर अपने गांव ले जाना पड़ा।
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत डीपाडीह से अपने घर बचवार लौट रहे शिक्षक सुरेश कोरवा की बुधवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में मौत हो गई। वे मोटरसाइकिल से अपने घर वापस जा रहे थे कि इसी दौरान रास्ते में सड़क किनारे बने डिवाइडर से उनकी बाइक टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वह गंभीर रूप से घायल होकर सड़क से नीचे जा गिरे और मौके पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। सूचना मिलने पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शंकरगढ़ भेजा।
पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब अस्पताल प्रबंधन द्वारा शव स्वजनों (परिजनों) को सौंपा गया, तब उसे गांव तक पहुंचाने के लिए कोई सरकारी साधन नहीं मिला। अस्पताल में शव वाहन की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजनों को खुद ही निजी व्यवस्था करनी पड़ी। काफी मशक्कत और प्रयास करने के बाद एक पिकअप वाहन का इंतजाम हो सका, जिसके जरिए शव को गांव ले जाया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि शंकरगढ़ क्षेत्र के लिए यह कोई नई बात नहीं है। यहाँ सड़क दुर्घटना, बीमारी अथवा किसी अन्य कारण से मौत होने पर शवों के परिवहन के लिए लोगों को अक्सर निजी वाहनों, पिकअप या ट्रैक्टरों का सहारा लेना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब परिवारों के लिए यह स्थिति और भी ज्यादा पीड़ादायक और अमानवीय साबित होती है।
कतरन में यह भी बताया गया कि अभी हाल ही में चार जून को भी शव वाहन उपलब्ध नहीं होने के कारण एक मृतक का शव परिजनों को ट्रैक्टर में लादकर ले जाना पड़ा था।
क्षेत्र के नागरिकों में इस अव्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि पिछले कई वर्षों से लगातार क्षेत्र के लिए एक शव वाहन की मांग की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और प्रशासन अब तक केवल पत्राचार (कागजी कार्रवाई) तक ही सीमित है। धरातल पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।