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रायपुर। लाल आतंक का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे पूर्व माओवादियों की जिंदगी में एक नई सुबह की शुरुआत हुई है। सामान्य जीवन जीने, अपना घर-परिवार बसाने और वंश आगे बढ़ाने की चाह रखने वाले इन युवाओं के लिए बस्तर पुलिस और प्रशासन ने एक बड़ी संवेदनशील पहल की है। शनिवार को महारानी अस्पताल में माओवादी संगठन के क्रूर दबाव में 'जबरन नसबंदी' का शिकार हुए 30 पूर्व माओवादियों का सफल रिवर्सल नसबंदी (Reversal Vasectomy) ऑपरेशन किया गया।
यह ऐतिहासिक पहल यूरोलॉजिस्ट्स और बस्तर पुलिस के संयुक्त सहयोग से 'यूरोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया' द्वारा की गई, जिसमें देश के शीर्ष डॉक्टरों ने अपनी निशुल्क सेवाएं दीं।
बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और बस्तर जिलों में आत्मसमर्पण करने वाले शादीशुदा जोड़ों में ऐसे युवाओं की बड़ी संख्या है, जो संगठन की इस अमानवीय नीति का दंश झेल रहे थे। माओवादी संगठन में रहते हुए इन लड़ाकों की जबरन नसबंदी करा दी जाती थी ताकि वे बच्चे पैदा न कर सकें और संगठन छोड़कर न भागें।
बस्तर पुलिस द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन और 'लोन वरट्टू' (घर वापस आइए) जैसे अभियानों के तहत मुख्यधारा में लौटे युवाओं ने जब आला अफसरों के सामने अपना यह दर्द बयां किया, तो प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लिया। शनिवार को आयोजित इस विशेष चिकित्सा शिविर में कुल 70 पूर्व माओवादियों ने मेडिकल रजिस्ट्रेशन कराया, जिनमें से पहले चरण में 30 पुरुषों का जटिल माइक्रो-सर्जिकल ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, यह ऑपरेशन सूक्ष्म और जटिल होता है, जिसमें माइक्रोस्कोप की मदद से ब्लॉक हो चुकी नसों को दोबारा चालू किया जाता है। ठीक 15 दिन बाद दोबारा ऐसा ही एक और मेगा कैंप आयोजित किया जाएगा।
"मैं साल 2003 में स्थानीय कमांडरों के बहकावे में आकर माओवादी संगठन में शामिल हुआ था। साल 2009 में संगठन के भीतर ही मेरी मर्जी से शादी हुई, लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद बड़े कमांडरों का मानसिक और शारीरिक दबाव आने लगा। उन्होंने साफ अल्टीमेटम दे दिया कि यदि संगठन में जिंदा रहना है और काम करना है, तो नसबंदी करानी ही होगी। इसके बाद साल 2010 में जंगल के एक गुप्त कैंप में मेरी इच्छा के विरुद्ध जबरन नसबंदी कर दी गई।
हम सालों तक अंदर ही अंदर घुटते रहे। आखिरकार तंग आकर साल 2025 में मैंने अपनी पत्नी के साथ बस्तर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। सरकार की पुनर्वास नीति से सब कुछ मिला, लेकिन संतान न होने का दर्द हमेशा कचोटता था। आज इस सफल विधिक ऑपरेशन के बाद मेरे दिल में यह उम्मीद जागी है कि अब मेरे घर में भी मेरा खुद का बच्चा रोएगा और खेलेगा।" - राजू सलाम (परिवर्तित नाम), पूर्व माओवादी
"यह कार्यक्रम सिर्फ एक सर्जरी मात्र नहीं है, बल्कि उन युवाओं को उनका बुनियादी अधिकार और सामाजिक पहचान दिलाने की कोशिश है, जिसे माओवादियों ने अपने क्रूर तंत्र के दम पर जबरन छीन लिया था। बस्तर पुलिस आत्मसमर्पित नक्सलियों के पारिवारिक पुनर्वास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।" - सुंदरराज पी., आईजी, बस्तर रेंज