

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

supreme court vantara jamnagar wildlife conservation legal transparent plea dismissed
नई दिल्ली: गुजरात के जामनगर में स्थित रिलायंस फाउंडेशन और रिलायंस इंडस्ट्रीज समर्थित वन्यजीव रेस्क्यू और पुनर्वास केंद्र 'वंतारा' (Vantara) को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने वंतारा से जुड़े पशु आयात और संरक्षण कार्यों पर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि इस संस्था द्वारा किया जा रहा काम पूरी तरह वैध, पारदर्शी और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।
अदालत ने यह भी माना कि वंतारा, उसके ट्रस्टियों, निदेशकों और प्रबंधन के पक्ष में स्थापित और निहित अधिकार बन चुके हैं, जिसका विस्तार रिलायंस फाउंडेशन और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी संस्थाओं तक होगा।
यह अहम फैसला सुप्रीम कोर्ट के माननीय जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने सुनाया। पीठ ने उस नई याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें पहले से जांचे जा चुके मामलों को दोबारा खोलने की मांग की गई थी।
अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि इन मामलों की पहले ही एक उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (SIT) द्वारा विस्तृत जांच की जा चुकी है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वंतारा ने हर स्तर पर पूरी सद्भावना के साथ काम किया है, इसलिए नई जांच की मांग को बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पशु कल्याण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा “वैध रूप से लाए गए और पूरी देखभाल में रह रहे बचाए गए जानवरों को उनके मौजूदा सुरक्षित और अनुकूल वातावरण से हटाना भी एक प्रकार की क्रूरता माना जा सकता है।”
सुप्रीम कोर्ट ने वंतारा की तारीफ करते हुए माना कि जामनगर के इस केंद्र में वैश्विक महत्व का संरक्षण कार्य किया जा रहा है। संस्था के अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि इसमें ब्राजील के साथ मिलकर संकटग्रस्त 'मकाऊ' (Macaw) पक्षियों की प्रजातियों की पुनर्स्थापना और उनका संरक्षण भी शामिल है।
खंडपीठ ने यह स्पष्ट किया कि उसके द्वारा जारी किए गए निर्देश भविष्य को ध्यान में रखते हुए भारत के सीआईटीईएस (CITES) ढांचे को मजबूत करने व नियामक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए हैं।