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bharatmala scam gandhi family compensation probe
रायपुर। भारतमाला परियोजना के भूमि अधिग्रहण मुआवजा मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। इस मामले में अभनपुर निवासी जयप्रकाश गांधी की गिरफ्तारी के बाद गांधी परिवार से जुड़े कई मुआवजा प्रकरण जांच के केंद्र में आ गए हैं। ईडी का आरोप है कि कुछ सरकारी अधिकारियों और कथित मास्टरमाइंड हरमीत सिंह खनूजा के साथ मिलीभगत कर करोड़ों रुपये का मुआवजा हासिल किया गया।
ईडी ने 3 जून को जयप्रकाश गांधी को गिरफ्तार किया था। अगले दिन उसे विशेष पीएमएलए न्यायालय में पेश किया गया, जहां से तीन दिन की रिमांड मंजूर की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, गांधी परिवार के कई सदस्यों को नायकबांधा गांव में भूमि अधिग्रहण के बदले 10 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा मिला।
जांच में सामने आया है कि गांधी परिवार से जुड़े 14 मामलों में कुल 0.4800 हेक्टेयर (करीब 48 डिसमिल) भूमि के बदले 11 करोड़ 62 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा स्वीकृत कराया गया। अधिकांश आदेश 13 अप्रैल 2020 को जारी किए गए, जबकि कुछ आदेश 27 अप्रैल 2020 को पारित हुए।
आरोप है कि छोटी-छोटी जमीनों को अलग-अलग नामों पर दिखाकर और भू-अर्जन प्रक्रिया में हेरफेर कर असामान्य रूप से अधिक मुआवजा प्राप्त किया गया। कई मामलों में 0.03 से 0.05 हेक्टेयर भूमि पर 70 लाख रुपये से लेकर 1.19 करोड़ रुपये तक का भुगतान किया गया।
दस्तावेजों के अनुसार कमला देवी गांधी, निधि गांधी, जयप्रकाश गांधी, लता गांधी, किरण गांधी, विनय कुमार गांधी, नीरज कुमार गांधी और गोपाल गांधी सहित कई नाम मुआवजा सूची में शामिल हैं।
प्रमुख भुगतान इस प्रकार बताए जा रहे हैं-
कमला देवी गांधी : 1.79 करोड़ रुपये से अधिक
निधि गांधी : 2.63 करोड़ रुपये से अधिक
जयप्रकाश गांधी : 1.55 करोड़ रुपये से अधिक
लता गांधी : 1.19 करोड़ रुपये
किरण गांधी : 1.19 करोड़ रुपये
विनय कुमार गांधी : लगभग 96 लाख रुपये
नीरज कुमार गांधी : लगभग 48 लाख रुपये
गोपाल गांधी : लगभग 48 लाख रुपये
जांच एजेंसियों को दूसरे चरण के भू-अर्जन रिकॉर्ड में भी गांधी परिवार से जुड़े नाम मिले हैं। नीरज कुमार गांधी और बंशीलाल गांधी के नाम पर दोबारा भूमि अधिग्रहण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि कुछ मामलों में एक ही भूमि पर दो बार मुआवजा स्वीकृत कराया गया हो सकता है। एजेंसियां दोनों चरणों के रिकॉर्ड का मिलान कर रही हैं।
ईडी और अन्य जांच एजेंसियां रायपुर जिले के अभनपुर अनुविभाग अंतर्गत नायकबांधा, झांकी, उरला, मुड़पार, सातपारा, कोलर, टोकरो, बिरोदा, नवागांव और डोमा समेत कई गांवों में मुआवजा वितरण की जांच कर रही हैं।
आरोप है कि गांधी, गुप्ता, गोलछा, राठी और अग्रवाल परिवारों से जुड़े कुछ लोगों ने भूमि को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित कर अधिक मुआवजा हासिल करने की रणनीति अपनाई। शिकायतों में भूमि का स्वरूप बदलने, एक से अधिक बार अवार्ड पारित करने और नियमों की अनदेखी करने जैसे आरोप भी शामिल हैं।
ईडी ने 28 अप्रैल 2026 को रायपुर, अभनपुर और धमतरी जिले के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान कथित मुआवजा अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य साक्ष्य जब्त किए गए। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित रूप से प्राप्त धनराशि का निवेश कहां और किस माध्यम से किया गया।
राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए इस मामले में अब उच्च स्तरीय जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सरकारी नुकसान की भरपाई की मांग तेज हो गई है।