

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

bhilai-mahila-sahkar-bharati-sammelan-laxmi-rajwade
भिलाई। छत्तीसगढ़ की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े रविवार को भिलाई के ब्रह्मकुमारी संस्थान में आयोजित 'प्रदेश स्तरीय महिला सहकार भारती सम्मेलन' में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, कुपोषण मिटाने और राज्य सरकार की आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
महिलाओं की भागीदारी और 'पंच परिवर्तन' का आह्वान
मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सहकार भारती के माध्यम से महिलाओं में आत्मबल और आत्मशक्ति जागृत करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि देश की आधी आबादी महिलाओं की है, इसलिए विकास की मुख्यधारा में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना अनिवार्य है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 'पंच परिवर्तन' अभियान का उल्लेख करते हुए कहा “2047 तक भारत को 'विकसित राष्ट्र' बनाने के सपने को साकार करने के लिए आत्मनिर्भरता और 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना ज़रूरी है। जब हमारा परिवार संगठित होगा, तभी राष्ट्र सशक्त बनेगा।”
'रेडी टू ईट' योजना: स्वयं सहायता समूहों को वापस मिली कमान
पिछली सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए मंत्री रजवाड़े ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने महिलाओं से 'रेडी टू ईट' (Ready to Eat) योजना का काम छीनकर बीज निगम को दे दिया था, जिसे वर्तमान सरकार अब चरणबद्ध तरीके से वापस समूहों को सौंप रही है।
वर्तमान में 6 जिलों में यह काम स्वयं सहायता समूहों को वापस दिया जा चुका है। जल्द ही प्रदेश के सभी जिलों में इसे लागू किया जाएगा, जिससे हजारों महिलाएं फिर से आर्थिक रूप से सक्षम हो सकेंगी।
सरगुजा और बस्तर पर विशेष फोकस
राज्य को कुपोषण से उबारने के लिए सरकार ने एक नया पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। मंत्री ने बताया कि सरगुजा संभाग के 8 जिले और बस्तर संभाग के 8 जिलों को इस अभियान के लिए चिन्हांकित किया गया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से लेकर अधिकारियों तक को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि पोषण आहार सही तरीके से बच्चों तक पहुँचे। मंत्री ने विश्वास जताया कि अगले छह महीनों में प्रदेश में कुपोषण की दर में भारी गिरावट आएगी।
बजट और बुनियादी ढांचा: आंगनवाड़ी बनेंगे 'नर्सरी' स्कूल
महिला एवं बाल विकास विभाग के 11 हजार करोड़ रुपये के बजट पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को कुपोषण से बाहर निकालना और उन्हें संस्कारवान बनाना है। सरकार अब आंगनवाड़ी केंद्रों को प्राइवेट स्कूलों की तर्ज पर विकसित कर रही है, जहाँ 3 से 6 साल के बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा और संस्कार दिए जाएंगे।
'धर्म स्वतंत्र विधेयक' पर प्रतिक्रिया
धर्मांतरण कानून (छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्र विधेयक) के पारित होने पर मंत्री ने मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा “यह कानून सिर्फ सरगुजा या बस्तर के लिए नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए कवच है। बहला-फुसलाकर किए जाने वाले धर्मांतरण पर अब कड़ाई से रोक लगेगी, जिससे हमारा समाज और संस्कृति सुरक्षित रहेगी।”