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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों धर्म और राजनीति को लेकर छिड़ी बयानबाज़ी लगातार तेज होती जा रही है। कांग्रेस नेता चरणदास महंत और जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य के बीच शुरू हुआ विवाद अब बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है। इस पूरे मामले में अब पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने भी खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है।
भूपेश बघेल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि धार्मिक मंचों और सनातन की राजनीति को चुनिंदा मुद्दों तक सीमित कर दिया गया है। उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि आखिर उन्हें हिंदू समाज का सर्वोच्च प्रतिनिधि मानने का आधार क्या है।
बघेल ने कहा कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में मोहन भागवत को विशेष महत्व दिया गया, जबकि कई पारंपरिक संत और धर्माचार्य पीछे नजर आए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को पहले अपने भीतर झांकना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य से भी अप्रत्यक्ष सवाल करते हुए कहा कि यदि गौ रक्षा और सनातन की बात की जाती है, तो फिर उन नेताओं पर संत समाज की प्रतिक्रिया क्यों नहीं आती जो गौमांस या उससे जुड़े विवादों पर घिरे रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और कुछ राज्यों की राजनीति का उदाहरण देते हुए भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा और संघ धार्मिक भावनाओं को चुनावी मुद्दा बनाते हैं, लेकिन आम जनता से जुड़े असली सवालों पर चर्चा नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म के नाम पर समाज को बांटने की कोशिश की जा रही है।
इधर भाजपा ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा है कि कांग्रेस नेताओं की सोच लगातार सनातन विरोधी रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि संत समाज पर टिप्पणी कर कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की कोशिश कर रही है।
फिलहाल, चरणदास महंत के बयान से शुरू हुआ यह विवाद अब प्रदेश में भाजपा बनाम कांग्रेस की नई सियासी जंग का केंद्र बन चुका है। बयानबाज़ी के इस दौर में आने वाले दिनों में राजनीति और गर्म होने के संकेत मिल रहे हैं।