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छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी का दौर तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel के विश्रामपुर में दिए गए बयान को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री Shyam Bihari Jaiswal ने भूपेश बघेल पर तीखा हमला बोलते हुए कांग्रेस की कार्यशैली को “राजनीतिक आतंकवाद” तक करार दे दिया।
मामला उस बयान से जुड़ा है जिसमें भूपेश बघेल ने विश्रामपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पुलिस प्रशासन के अधिकारियों टीआई, एसपी और आईजी को चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा था कि यदि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को परेशान किया गया तो “सरकार बदलने के बाद हिसाब लिया जाएगा।” इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
क्या बोले थे भूपेश बघेल?
विश्रामपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंच से कहा था “ये टीआई, एसपी और आईजी कान खोलकर सुन लें… पांच साल बाद फिर हमारी सरकार आ रही है। अगर हमारे कार्यकर्ताओं को परेशान किया, फर्जी केसों में फंसाया या प्रताड़ित किया, तो याद रखना कि हमारा डायरी-पन्ना बहुत मजबूत है। सबका हिसाब रखा जा रहा है। सरकार बदलते ही एक-एक का हिसाब लिया जाएगा और उन्हें भुगतना पड़ेगा।”
भूपेश बघेल के इस बयान को भाजपा ने प्रशासनिक अधिकारियों को खुलेआम धमकाने की कोशिश बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था और प्रशासनिक निष्पक्षता के खिलाफ है।
भूपेश बघेल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि डर और धमकी की राजनीति कांग्रेस की पुरानी संस्कृति रही है और प्रदेश ने पिछले पांच वर्षों में इसका अनुभव किया है।
जायसवाल ने कहा “डराना, धमकाना और भय का माहौल बनाना कांग्रेस के डीएनए में है। पूरा छत्तीसगढ़ पिछले पांच साल इनके राजनीतिक आतंकवाद से पीड़ित रहा है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के दौरान अधिकारी, कर्मचारी, पुलिस प्रशासन और आम जनता तक दबाव और भय के माहौल में काम करने को मजबूर थे। मंत्री ने कहा कि आज भी पूर्व मुख्यमंत्री के भाषणों में वही पुरानी “देख लेने” वाली मानसिकता झलकती है।
स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस शासनकाल को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय प्रदेश में भय और दबाव का वातावरण था।
माफिया और गुंडा तत्वों को संरक्षण देकर राजनीतिक दबाव बनाया जाता था।
अधिकारियों और कर्मचारियों पर राजनीतिक दबाव डाला जाता था।
प्रशासन को निष्पक्ष रूप से काम करने नहीं दिया जाता था।
डरा-धमकाकर राजनीति करना कांग्रेस की पुरानी परंपरा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा सरकार प्रशासन को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करने का माहौल दे रही है, जबकि कांग्रेस सत्ता में रहते हुए बदले की राजनीति करती रही है।
भूपेश बघेल के बयान और उस पर भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस इस बयान को कार्यकर्ताओं के समर्थन में दिया गया “राजनीतिक संदेश” बता रही है, जबकि भाजपा इसे प्रशासनिक अधिकारियों को धमकाने की कोशिश करार दे रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावी माहौल को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो सकता है। प्रदेश में कानून व्यवस्था, प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक दबाव जैसे मुद्दे आने वाले दिनों में सियासत के केंद्र में रह सकते हैं।