

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

bilaspur land fraud kishore dayalani patwari dhirendra singh
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से जालसाजी और राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक जूता कारोबारी ने पटवारी और तत्कालीन राजस्व अधिकारियों के साथ साठगांठ कर 3 डिसमिल जमीन को कागजों पर 6 डिसमिल बना दिया और फिर उसे मोटी कीमत पर दो अलग-अलग लोगों को बेच दिया। पुलिस ने इस मामले में जांच के बाद जूता कारोबारी किशोर दयालानी और तत्कालीन पटवारी समेत अन्य अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी व कूटरचना (फर्जी दस्तावेज तैयार करने) का अपराध दर्ज कर लिया है।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार, सिंधी कॉलोनी स्मार्ट रोड निवासी किशोर दयालानी (पिता डूलाराम दयालानी) जूता और जमीन का कारोबार करता है। गोलबाजार और राजीव प्लाजा में उसकी दुकानें हैं।
किशोर दयालानी ने 16 जनवरी 2009 को कस्तूरबा नगर, जरहाभाठा (खसरा नंबर 54/25) में लोईस हीराधर और श्वेता हीराधर से एक खुली भूमि खरीदी थी। रजिस्ट्री और तत्कालीन बी-1 (वर्ष 2002 से 2006 तक के रिकॉर्ड) के अनुसार, इस जमीन का कुल रकबा 0.012 हेक्टेयर यानी 3 डिसमिल (1295 वर्गफुट) था।
आरोप है कि किशोर दयालानी ने तत्कालीन हल्का पटवारी धीरेंद्र सिंह और अन्य राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर पूरा षड्यंत्र रचा। वर्ष 2006-07 से 2010-11 के मूल खसरा फॉर्म पी-2 में बकायदा ओवरराइटिंग की गई। सरकारी दस्तावेज पर पेन चलाकर 0.012 हेक्टेयर को 0.024 हेक्टेयर लिख दिया गया। जमीन कागजों पर दोगुनी (6 डिसमिल) होते ही किशोर दयालानी ने साल 2011 में इसके 3-3 डिसमिल के दो हिस्से किए और दो अलग-अलग लोगों को मोटी कीमत पर बेच दिया।
इस पूरे वीआईपी इलाके के फर्जीवाड़े का खुलासा सिंधी कॉलोनी निवासी प्रॉपर्टी इन्वेस्टर शंकर लाल दयालानी ने किया, जो पिछले 20 वर्षों से बिलासपुर में प्रॉपर्टी का काम कर रहे हैं। दरअसल, कस्तूरबा नगर की इस विवादित जमीन पर बने मकान को बेचने की तैयारी चल रही थी। शंकर लाल इसे खरीदना चाहते थे। लेकिन सौदा करने से पहले उन्होंने सावधानी बरतते हुए साल 2002 से लेकर 2011 तक के सारे राजस्व रिकॉर्ड (बी-1 और खसरा पी-2) निकलवाए। रिकॉर्ड देखते ही उनके होश उड़ गए, क्योंकि सरकारी कागजों में की गई कूटरचना और काट-छांट साफ नजर आ रही थी।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला, जल्द होगी गिरफ्तारी
मामले की लिखित शिकायत मिलते ही सिविल लाइन पुलिस ने पूरे मामले की बारीकी से जांच की। पुलिस ने पाया कि दस्तावेजों में साफ तौर पर हेराफेरी की गई है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य' मामले में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए सिविल लाइन पुलिस ने बिना किसी देरी के धोखाधड़ी, सरकारी दस्तावेजों में कूटरचना, फर्जी दस्तावेज तैयार करने और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया है।
पुलिस अब तत्कालीन पटवारी और रजिस्ट्री कार्यालय के पुराने रिकॉर्ड खंगाल रही है। माना जा रहा है कि इस मामले में संलिप्त तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की जल्द ही गिरफ्तारी हो सकती है।