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बिलासपुर। सरकंडा क्षेत्र के लोधीपारा के पास अचेत अवस्था में मिले सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर दंपती के पुत्र यशवर्धन सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई। स्थानीय लोगों ने मानवता दिखाते हुए उसे तत्काल पुराना सरकंडा स्थित प्रज्ञा अस्पताल में भर्ती कराया, जहां प्राथमिक उपचार शुरू हुआ।
घटना की जानकारी मिलते ही उसके माता-पिता मौके पर पहुंचे और बेहतर इलाज के लिए उसे अपोलो अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यशवर्धन ने करीब चार महीने पहले ही आत्महत्या की योजना बना ली थी। उसकी स्कूटी से 400 ग्राम सायनाइड बरामद किया गया है, जिसे उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मंगाया था। इस खरीद की रसीद भी पुलिस ने जब्त कर ली है।
मामले में सामने आया है कि पढ़ाई के दबाव और मानसिक तनाव के चलते वह डिप्रेशन में था और संभवतः इसी कारण उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। मंगलवार शाम राधा-कृष्ण मंदिर के पास राहगीरों ने उसे अचेत अवस्था में देखा और तुरंत अस्पताल पहुंचाया था।
अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि सायनाइड का सेवन करने के बाद वह स्कूटी से लोधीपारा तक कैसे पहुंचा और जहर का डिब्बा स्कूटी में ही क्यों लटका रहा।
इस घटना ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए खतरनाक रसायनों की आसानी से उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महीनों तक छात्र के पास सायनाइड मौजूद रहा, लेकिन इसकी जानकारी किसी को नहीं हो सकी।