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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) में हुए करीब 182.98 करोड़ रुपए के 'मैनपावर ओवरटाइम भुगतान घोटाले' को लेकर राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) ने सोमवार को माननीय विशेष न्यायालय में अपना पहला अभियोग पत्र (चार्जशीट) पेश कर दिया है। इस हाई-प्रोफाइल चार्जशीट में शराब कारोबारी अनवर ढेबर समेत कुल 12 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है।
EOW/ACB की जांच में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। विवेचना के अनुसार, वर्ष 2019-20 से लेकर 2023-24 के बीच मैनपावर एजेंसियों को कर्मचारियों के नाम पर ओवरटाइम, बोनस, अतिरिक्त 4 दिन के कार्य का भुगतान और सर्विस चार्ज के नाम पर करोड़ों रुपए की भारी-भरकम राशि जारी की गई।
जांच में साफ हुआ कि यह पैसा जमीन पर काम करने वाले वास्तविक कर्मचारियों तक पहुंचा ही नहीं। इसे सोची-समझी साजिश के तहत भारी कमीशनखोरी और सिंडिकेट के आर्थिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया।
एजेंसी ने जिन प्रमुख चेहरों और अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
1. अनवर ढेबर
2. नवीन प्रताप सिंह तोमर
3. तिजऊराम निर्मलकर
4. अभिषेक सिंह
5. नीरज कुमार चौधरी
6. अजय लोहिया
7. अजीत दरंदले
8. अमित प्रभाकर सालुंके
9. अमित मित्तल
10. एन. उदय राव
11. राजीव द्विवेदी
12. संजीव जैन
इन सभी आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7(बी), 8 और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 467, 468, 471 और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक मैनपावर एजेंसियों को अलग-अलग मदों में जो अतिरिक्त भुगतान दिखाया गया, उसका पूरा गणित इस प्रकार है।
ओवरटाइम भुगतान, लगभग ₹101.20 करोड़
अतिरिक्त 4 दिवस कार्य, भुगतान लगभग ₹54.46 करोड़
इन मदों पर सर्विस चार्ज, लगभग ₹15.11 करोड़
बोनस भुगतान, लगभग ₹12.21 करोड़
कुल भुगतान, लगभग ₹182.98 करोड़
EOW की जांच की आंच कई बड़ी मैनपावर एजेंसियों तक पहुंची है, जिनके माध्यम से यह पूरा खेल रचा गया। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
सुमीत फैसिलिटीज
प्राईमवन वर्कफोर्स
ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस
अलर्ट कमाण्डोज
ईगल इंटर सॉल्यूशन्स
जांच के दौरान दस्तावेजों, कंपनी प्रतिनिधियों, CSMCL के आला अधिकारियों, शराब दुकानों के जमीनी कर्मचारियों और कैश के लेनदेन से जुड़े गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सभी बयानों से यह साबित हुआ कि कर्मचारियों के हक का पैसा सिंडिकेट की अवैध कमीशन व्यवस्था की भेंट चढ़ गया।
इस पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने में 29 नवंबर 2023 को पकड़ी गई 28.80 लाख रुपए की कैश रिकवरी सबसे मजबूत कड़ी साबित हुई है। EOW/ACB के मुताबिक, यह रकम ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड और अलर्ट कमाण्डोज प्राइवेट लिमिटेड के बिल पास कराने के एवज में कमीशन के तौर पर नवीन प्रताप सिंह तोमर तक पहुंचाई जानी थी। इस रकम की डिलीवरी और लेन-देन में तिजऊराम निर्मलकर और अभिषेक सिंह की भूमिका भी पूरी तरह उजागर हो चुकी है।
EOW/ACB ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल प्रथम अभियोग पत्र (First Charge Sheet) है। इस घोटाले से जुड़े अन्य रसूखदारों की भूमिका, अवैध कमाई के निवेश, और मनी ट्रेल (वित्तीय लेनदेन) की जांच अभी भी तेजी से जारी है। आने वाले दिनों में नए सबूत मिलते ही इस मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट के जरिए कुछ और बड़े चेहरों पर गाज गिर सकती है।