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cg govt withdraws controversial order on employee unions
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में पिछले 48 घंटों से चल रहा गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के राजनीतिक और अन्य संगठनों में शामिल होने पर रोक संबंधी अपने विवादित आदेश पर 'यू-टर्न' ले लिया है। 21 अप्रैल को जारी किए गए इस कड़े निर्देश को व्यापक विरोध के बाद मात्र 24 घंटे के भीतर स्थगित कर दिया गया है।
बीते 21 अप्रैल को शासन द्वारा एक आदेश जारी किया गया था, जिसमें सरकारी कर्मचारियों के लिए नए और कड़े नियम लागू किए गए थे। इस आदेश के तहत सरकारी कर्मचारियों के राजनीतिक दलों एवं अन्य संगठनों में शामिल होने, किसी पद पर रहने और सक्रिय भागीदारी पर रोक लगा दी गई थी। साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया था कि किसी भी संस्था या संगठन से जुड़ने से पहले शासन से अनुमति लेना जरूरी होगा।
आदेश जारी होते ही प्रदेश भर के कर्मचारी संगठनों में उबाल आ गया। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने इसे कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। अब आदेश को वापस लेने के बाद छग कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा ने कहा- कल छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमों का हवाला देते हुए एक फरमान जारी किया गया था। उक्त आदेश में शासकीय सेवकों को किसी भी कर्मचारी संगठनों से जुड़ने से पहले अपने विभाग या सक्षम अधिकारी से अनुमति लेने की बात कही गई थी। इस आदेश को लेकर पूरे प्रदेश भर में भारी विरोध हो रहा था। हमने भी सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव और उप-सचिव के सामने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। परिणामस्वरूप, शासन को उक्त आदेश को वापस लेना पड़ा। मेरा सरकार से विनम्र अनुरोध है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत कर्मचारी संगठनों के द्वारा अपनी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष अपनी बात को रखते हैं। यह सुंदर व्यवस्था जो बनी हुई है, उसे भविष्य में बनाए रखने के लिए हमें सहयोग प्रदान करें, ऐसी अपेक्षा हम इस सरकार से करते हैं। धन्यवाद।"