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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। एक ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तृणमूल कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि पिछले 15 वर्षों में राज्य को 50 साल पीछे धकेल दिया गया है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा और निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाकर चुनावी मुकाबले को और तेज कर दिया है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, भारी जब्ती और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को निर्वाचन आयोग के नोटिस ने चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
अमित शाह का तृणमूल सरकार पर बड़ा हमला
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को दमदम में जनसभा को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार और जनविरोधी नीतियों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तृणमूल ने बंगाल के युवाओं को नौकरी से वंचित रखा, किसानों की उपज की कालाबाजारी होने दी और गरीबों के राशन तक में घोटाले किए।
शाह ने कहा कि राज्य की जनता अब बदलाव चाहती है और लोगों का उत्साह यह संकेत दे रहा है कि मौजूदा सरकार की विदाई तय है। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में "सिंडिकेट राज" ने विकास को रोक दिया है और भाजपा की सरकार बनने पर इस व्यवस्था को समाप्त कर पारदर्शी शासन दिया जाएगा।
शाम को शाह ने सोनारपुर दक्षिण सीट से भाजपा उम्मीदवार के समर्थन में रोड शो भी किया। इस दौरान बड़ी संख्या में भाजपा समर्थक सड़कों पर उतरे और पार्टी के समर्थन में नारे लगाए। शाह ने लोगों से अपील की कि वे राज्य में सत्ता परिवर्तन कर विकास की नई शुरुआत करें।
ममता बनर्जी का पलटवार
अमित शाह के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हावड़ा में तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवारों के समर्थन में रोड शो किया। वह कैरी रोड से शंकर मठ तक करीब दो किलोमीटर पैदल चलीं। रास्ते में समर्थकों ने फूल बरसाकर उनका स्वागत किया।
ममता बनर्जी ने भाजपा पर बाहरी लोगों को लाकर चुनाव प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने निर्वाचन आयोग के कुछ फैसलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बाइक मूवमेंट रोकने जैसे फैसलों के नाम पर मतदाताओं को डराने का प्रयास किया जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस ऑब्जर्वरों के मौखिक निर्देशों के आधार पर 500 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी की गई है, जो कानूनी प्रक्रिया के खिलाफ है।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों के काम में राजनीतिक हस्तक्षेप लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है। मामला 8 जनवरी को ममता बनर्जी की राजनीतिक सलाहकार संस्था आई-पैक पर ईडी की कार्रवाई से जुड़ा हुआ है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कहा कि इस तरह के मामलों को केवल केंद्र और राज्य सरकार के बीच का विवाद नहीं माना जा सकता। अदालत अब यह तय करेगी कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुनवाई योग्य है या नहीं।
चुनाव के बीच 1000 करोड़ से ज्यादा की जब्ती
निर्वाचन आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव के दौरान अब तक 1000 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी, शराब, ड्रग्स और मुफ्त बांटे जाने वाले सामान की जब्ती की जा चुकी है।
आयोग के मुताबिक 26 फरवरी से अब तक कुल 1072.13 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त की गई है। इसमें शामिल हैं।
127.67 करोड़ रुपये नकद
41 हजार लीटर शराब, जिसकी कीमत 106.3 करोड़ रुपये
करीब 184 करोड़ रुपये के ड्रग्स
215 करोड़ रुपये का सोना-चांदी
418 करोड़ रुपये के फ्रीबीज
निर्वाचन आयोग ने इसे निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ी कार्रवाई बताया है।
खरगे को आयोग का नोटिस
चुनावी माहौल के बीच निर्वाचन आयोग ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर नोटिस जारी किया है।
आयोग ने खरगे से 24 घंटे के भीतर जवाब मांगा है। बताया गया कि खरगे ने चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के लिए आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था। यह बयान तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदान से ठीक पहले सामने आया।
हालांकि बाद में खरगे ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया और उनका किसी को व्यक्तिगत रूप से अपमानित करने का इरादा नहीं था।
चुनावी माहौल और तेज
पश्चिम बंगाल में मतदान नजदीक आने के साथ भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार बढ़ते जा रहे हैं। एक ओर भाजपा भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था को मुद्दा बना रही है, तो दूसरी ओर तृणमूल बाहरी हस्तक्षेप और प्रशासनिक दबाव का आरोप लगा रही है।
राजनीतिक दलों के बीच बढ़ती बयानबाजी, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और निर्वाचन आयोग की सक्रियता ने बंगाल चुनाव को देश की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल कर दिया है। अब सभी की नजरें मतदान और उसके परिणामों पर टिकी हैं।