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रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGMSC (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन) घोटाले में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। जांच एजेंसियों ने इस मामले में चार आरोपियों, कौशल, राकेश जैन, प्रिंस जैन और कुंजल के खिलाफ अदालत में चालान पेश कर दिया है। विस्तृत जांच के बाद 3611 पन्नों का दस्तावेज कोर्ट में जमा किया गया, जो पूरे मामले की गंभीरता को दर्शाता है।
जांच में खुलासा हुआ है कि निविदा प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। आरोपियों ने आपसी मिलीभगत कर टेंडर हासिल किए और प्रतिस्पर्धा को प्रभावित किया। कई फर्मों के बीच कार्टल बनाकर संगठित तरीके से बोली प्रक्रिया को प्रभावित करने के सबूत सामने आए हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, तीन अलग-अलग फर्मों द्वारा भरे गए टेंडरों में उत्पादों, पैक साइज, रिएजेंट और कंज्यूमेबल्स का विवरण लगभग एक जैसा पाया गया। इतना ही नहीं, कुछ ऐसे उत्पाद भी शामिल किए गए जो मूल निविदा दस्तावेज का हिस्सा नहीं थे। दरों में भी समानता मिलने से मिलीभगत के आरोप और मजबूत हो गए हैं।
मामले में यह भी सामने आया है कि दवाओं और मेडिकल उपकरणों की सप्लाई एमआरपी से तीन गुना तक अधिक कीमत पर की गई। इससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हुआ है।
इस घोटाले में अब तक कुल 10 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है। जांच एजेंसियां अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
यह पूरा मामला राज्य सरकार की ‘हमर लैब’ योजना से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में मुफ्त डायग्नोस्टिक सुविधाएं उपलब्ध कराना था। आरोप है कि इसी योजना के तहत टेंडर प्रक्रिया में धांधली कर करीब 550 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया।
जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।