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रायपुर: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में एक बड़ा और बेहद गंभीर मोड़ आ गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट पेश करने और जांच के दौरान मिले इनपुट के बाद, अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले में अपनी बड़ी एंट्री कर ली है। बुधवार (3 जून 2026) सुबह तड़के 5 बजे से ही ईडी की 25 सदस्यीय टीम ने मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन के एंगल से रायपुर, भिलाई, दुर्ग, धमतरी और राजनांदगांव सहित प्रदेश के 8 से 10 प्रमुख ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। ईडी की इस अचानक हुई कार्रवाई से राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईडी के निशाने पर सीजीपीएससी के पूर्व चेयरमैन और अधिकारी रहे हैं। मुख्य रूप से निम्नलिखित 5 रसूखदारों के सरकारी व निजी आवासों पर छानबीन की गई।
टामन सिंह सोनवानी: सीजीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष (धमतरी के सर्वदा स्थित गृह ग्राम और रायपुर निवास पर सुबह 5 बजे टीम पहुंची)।
जेके ध्रुव: सीजीपीएससी के तत्कालीन सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस (भिलाई के सेक्टर-10 स्थित निवास 'जीवन किशोर ध्रुव' पर कार्रवाई)।
अमृत खलखो: राज्यपाल के पूर्व सचिव व पूर्व आईएएस अधिकारी (दुर्ग के तालपुरी स्थित आवास पर दबिश)।
आरती वासनिक: सीजीपीएससी की पूर्व परीक्षा नियंत्रक।
ललित गणवीर: सीजीपीएससी के तत्कालीन सहायक नियंत्रक (नया रायपुर स्थित सीजीपीएससी एम्पायर और भिलाई के तलपुरी ए ब्लॉक में जांच)।
सीबीआई की चार्जशीट के बाद ईडी अब इस पूरे मामले में 'मनी ट्रेल' (पैसे के बहाव) की गहराई से पड़ताल कर रही है। शुरुआती जांच और सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक करने के एवज में अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली गई थी।
जांच में यह अहम सुराग मिला है कि प्रश्नपत्र लीक के एवज में पूर्व चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी ने अपनी पत्नी के एक एनजीओ के माध्यम से करीब ₹45 लाख की राशि प्राप्त की थी।
आशंका जताई जा रही है कि घोटाले की यह बड़ी रकम हवाला ऑपरेटरों और विभिन्न माध्यमों से कुछ एनजीओ व कारोबारियों के खातों में ट्रांसफर की गई। जांच एजेंसी को कई ऐसे संदिग्ध वित्तीय ट्रांजैक्शन मिले हैं, जिनका उनकी वैध आय से कोई मेल नहीं है।
सीबीआई की चार्जशीट के हवाले से खबरों में बताया गया है कि तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक ने चेयरमैन टामन सिंह सोनवानी और सहायक नियंत्रक ललित गणवीर के साथ मिलकर 'प्री' और 'मेन्स' दोनों ही परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक किए थे। प्रश्नपत्र छापने का ठेका कोलकाता की एक निजी कंपनी को दिया गया था, जिसके संचालक को भी पूछताछ के घेरे में लिया गया है। आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद आरती वासनिक ने प्रिंटिंग कंपनी के संचालक को रिव्यू के नाम पर रायपुर बुलाया और प्रश्नपत्र अपने घर पर रखवाया था, जहां से इसे लीक किया गया।
दिनभर चली इस मैराथन छापेमारी के दौरान ईडी की टीमों ने अधिकारियों के घरों को पूरी तरह से खंगाल डाला। तलाशी के दौरान भारी मात्रा में जमीन-जायदाद के दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारियां, संदिग्ध निवेश के प्रमाण, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए हैं। ईडी इन सभी सामग्रियों का पंचनामा तैयार कर आगे की स्क्रूटनी कर रही है। बताया जा रहा है कि इस मामले में चिन्हित किए गए लोगों को जल्द ही नोटिस जारी कर ईडी दफ्तर में पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।