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देहरादून: उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली चारधाम यात्रा इस साल चुनौतीपूर्ण स्थिति में दिख रही है। पिछले साल शुरुआती 26 दिनों में यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का आंकड़ा 17 लाख के पार गया था, जबकि इस साल यही संख्या गिरकर 11,07,841 रह गई है।
यात्रा 19 अप्रैल से शुरू हो रही है, लेकिन पंजीकरण में आई यह गिरावट पर्यटन कारोबारियों के लिए चिंता का विषय बन गई है। अधिकांश ट्रैवल ऑपरेटरों ने एडवांस बुकिंग लेने से साफ इनकार कर दिया है।
पर्यटन व्यवसायी दीपक बिष्ट ने बताया कि वर्तमान युद्ध के हालात और ईंधन की कीमतों में संभावित वृद्धि के चलते बुकिंग करना जोखिम भरा है। उन्होंने कहा, “अगर हम आज के रेट पर बुकिंग लेते हैं और यात्रा शुरू होने तक डीजल-पेट्रोल महंगा हो गया, तो हमें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।”
विशेषज्ञों का कहना है कि चारधाम यात्रा से जुड़े होटल, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय व्यापार पर इस गिरावट का असर तुरंत दिखाई दे सकता है। पर्यटन विभाग ने फिलहाल स्थिति का आकलन किया है और यात्रियों की संख्या बढ़ाने के उपायों पर विचार किया जा रहा है।
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि राज्य की पर्यटन और अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार भी है। इस साल पंजीकरण में आई गिरावट से आर्थिक गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
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