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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने रेत खदानों के संचालन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब राज्य की कुछ रेत खदानें सीधे छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (CMDC) को भी सौंपी जाएंगी। प्रदेश में पहली बार ऐसा होने जा रहा है, जबकि देश के कई अन्य राज्यों में पहले से यह व्यवस्था लागू है। शुरुआत में केवल दो से चार खदानें निगम को दी जाएंगी, लेकिन आने वाले समय में इनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ाई जाएगी।
वर्तमान में प्रदेश में तीन तरह से रेत खदानों का संचालन हो रहा है। पहली वे 120 खदानें हैं, जिन्हें कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आवंटित किया गया था और उनकी लीज वर्ष 2028 तक है। दूसरी, अक्टूबर 2025 में जारी निविदा के बाद आवंटित करीब 200 खदानें हैं, जिनका संचालन जल्द शुरू होने वाला है। तीसरी श्रेणी में पेसा क्षेत्रों की खदानें हैं, जहां सरपंचों की अनुमति के बाद खनिज भंडार का लाइसेंस जारी किया जाता है।
अब चौथी श्रेणी के रूप में खनिज विकास निगम के माध्यम से रेत खदानों का संचालन किया जाएगा। खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने इसे सरकार का क्रांतिकारी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि निगम की वेबसाइट पर रेत की दरें ऑनलाइन प्रदर्शित की जाएंगी, जिससे कोई भी व्यक्ति माइनिंग शुल्क, लोडिंग और रॉयल्टी की राशि जमा कर सीधे रेत प्राप्त कर सकेगा।
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से रेत की उपलब्धता पारदर्शी होगी और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को समय पर निर्माण सामग्री मिल सकेगी। साथ ही अवैध खनन पर भी नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।