

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

chhattisgarh illegal sand mining zero tolerance sai govt
रायपुर: छत्तीसगढ़ में अवैध रेत खनन के खिलाफ साय सरकार ने अब तक का सबसे सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के 'जीरो टॉलरेंस' निर्देश के बाद खनिज विभाग के सचिव पी. दयानंद ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में अब रेत माफियाओं की मनमानी नहीं चलेगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी जिले में अवैध उत्खनन पाया जाता है, तो इसकी सीधी जवाबदेही जिला कलेक्टर की होगी।
खनिज विभाग के सचिव ने राज्य के उन 11 चिन्हित जिलों के कलेक्टरों के साथ आपात वर्चुअल बैठक की, जहाँ से रेत की सबसे अधिक सप्लाई होती है। बैठक का माहौल काफी सख्त रहा। सचिव ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि अगर राज्य के केंद्रीय उड़नदस्ता दल को किसी जिले में जाकर अवैध उत्खनन पकड़ना पड़ रहा है, तो यह स्थानीय प्रशासन की विफलता मानी जाएगी।
सरकार का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना ही नहीं, बल्कि बाजार में रेत की कीमतों को नियंत्रित करना भी है। सचिव पी. दयानंद ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं। आम जनता को उचित और निर्धारित कीमतों पर ही रेत उपलब्ध कराई जाए। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को 'रॉयल्टी मुक्त रेत' देने के नियम का कड़ाई से पालन हो। स्वीकृत खदानों से पूरी क्षमता के साथ उत्पादन सुनिश्चित किया जाए ताकि बाजार में किल्लत न हो और कीमतें न बढ़ें।
समीक्षा के दौरान खदानों की नीलामी प्रक्रिया को लेकर जिलों की प्रगति रिपोर्ट भी सामने आई। गरियाबंद, कांकेर और जांजगीर-चांपा जैसे जिलों ने 100% से अधिक की प्रगति दिखाई है। बिलासपुर, धमतरी और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-बैकुंठपुर नीलामी प्रक्रिया में पीछे रह गए हैं। इन जिलों के कलेक्टरों को साप्ताहिक समीक्षा करने और पर्यावरण स्वीकृति की प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
सचिव ने जिला प्रशासन को सक्रिय मोड में रहने का निर्देश देते हुए कहा कि अब शिकायतों का इंतजार न करें। मीडिया में छपने वाली खबरें और स्थानीय शिकायतों को 'अर्ली वार्निंग' माना जाए। ऐसी खबरों पर बिना समय गंवाए तत्काल छापेमारी और दंडात्मक कार्रवाई की जाए। बैठक के अंत में सचिव ने दोहराया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन प्राथमिकता है। रॉयल्टी छूट की आड़ में अगर अवैध खनन का खेल चलता पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी गाज गिरेगी। कलेक्टरों को व्यक्तिगत रूप से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि उनके क्षेत्र में खनन माफिया सक्रिय न हो पाएं।