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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए 32,00 करोड़ रुपये के शराब घोटाले और 575 करोड़ रुपये के डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) घोटाले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने गुरुवार को अहम कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने आबकारी विभाग के पूर्व सहायक आयुक्त नवीन कुमार तोमर और कारोबारी सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया है।
दोनों आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह संकेत मिल रहे हैं कि मामले की जांच फिर से विभाग के पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य कारोबारियों तक पहुंच सकती है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 29 नवंबर 2023 को नवीन तोमर से जुड़े तीन करीबी व्यक्तियों को हिरासत में लिया था। इनके पास से 28.8 लाख रुपये जब्त किए गए थे, जिन्हें रिश्वत और अवैध भुगतान की रकम के तौर पर चिन्हित किया गया। ईडी की कार्रवाई के बाद ईओडब्ल्यू ने प्रकरण में प्रथम सूचना पत्र दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच में पाया गया कि छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (सीएसएमसीएल) के अधिकारियों द्वारा संबद्ध मैन पावर एजेंसियों को षड्यंत्रपूर्वक अवैध भुगतान किया जाता था। भुगतान का एक हिस्सा कमीशन के रूप में लिया जाता और इसे सीएसएमसीएल के तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर तक पहुंचाया जाता था।
प्रारंभिक जांच में दस्तावेजी साक्ष्यों से पता चला है कि मैन पावर एजेंसियों को अवैध भुगतान करने के कारण शासन को लगभग 100 करोड़ रुपये की आर्थिक हानि हुई। इससे पहले गिरफ्तार आबकारी अधिकारी एपी त्रिपाठी के बयान भी मामले की जांच में शामिल किए गए। नवीन तोमर को गिरफ्तार कर विशेष न्यायालय में पेश किया गया और 28 फरवरी तक पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया।
रिमांड अवधि में उनसे नेटवर्क, फंड फ्लो और भूमिका के बारे में विस्तृत पूछताछ की जाएगी। अधिकारियों का अनुमान है कि इससे और भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
शराब घोटाले में अब तक 20 से अधिक आरोपी जेल में हैं। इनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल सहित कई अन्य आरोपी जमानत पर बाहर हैं।
डीएमएफ फंड से संचालित कृषि अनुदान कार्यों में वित्तीय अनियमितताएं और नियमों की अनदेखी सामने आई। प्रारंभिक जांच में यह पता चला कि शासकीय अधिकारी, कर्मचारी और व्यापारियों का आपराधिक षड्यंत्र इस घोटाले में शामिल था।
डीएमएफ फंड के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में ईओडब्ल्यू ने कारोबारी सतपाल सिंह छाबड़ा को गिरफ्तार किया और विशेष कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए छाबड़ा को 25 फरवरी तक ईओडब्ल्यू की हिरासत में सौंप दिया। रिमांड अवधि में छाबड़ा से डीएमएफ फंड के वितरण और इसमें शामिल अन्य रसूखदारों के बारे में सख्त पूछताछ की जाएगी।
इस कार्रवाई के बाद राज्य में शराब और डीएमएफ घोटाले की जांच नई गति पकड़ चुकी है और अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।