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रायपुर। छत्तीसगढ़ में चर्चित शराब घोटाला मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई लगातार जारी है। जांच के दौरान सामने आए डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों ने अवैध शराब के परिवहन के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा किया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, जब्त किए गए वाहनों का उपयोग अवैध शराब (पार्ट-बी) को डिस्टलरी से सीधे चयनित शासकीय शराब दुकानों तक पहुंचाने के लिए किया जाता था। इस पूरे ऑपरेशन में डिस्टलरी मालिक अपने भरोसेमंद व्यक्तियों को ट्रांसपोर्टिंग की जिम्मेदारी सौंपते थे, जो छोटे ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियों का इस्तेमाल करते थे।
EOW ने शराब घोटाला प्रकरण (अपराध क्रमांक 04/2024) में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत पहले ही वेलकम डिस्टलरी (कोटा, बिलासपुर) और भाटिया वाइंस डिस्टलरी (सरगांव, मुंगेली) से कुल 16 वाहन जब्त किए थे।
अब जांच के दौरान दुर्ग स्थित एक डिस्टलरी से जुड़े 3 और वाहनों की पहचान की गई है, जिनका इस्तेमाल भी अवैध शराब परिवहन में किया जा रहा था। इस तरह अब तक कुल 19 वाहनों की जब्ती हो चुकी है।
देशी शराब दुकानों तक सीधी सप्लाई विवेचना में यह स्पष्ट हुआ है कि अवैध शराब की सप्लाई डिस्टलरियों से सीधे कुछ चुनिंदा शासकीय देशी शराब दुकानों तक की जाती थी। इसके लिए कुछ तय वाहनों का बार-बार उपयोग किया जाता था, जिसकी पुष्टि साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से हुई है।
और भी वाहन जांच के दायरे में जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि दुर्ग डिस्टलरी में जब्त 3 वाहनों के अलावा कुछ अन्य गाड़ियों का भी उपयोग किया गया था। इनमें से कुछ को स्क्रैप किया जा चुका है या अन्य कामों में लगाया जा रहा है। इन वाहनों के स्वामित्व और उपयोग को लेकर अलग से जांच जारी है।