

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ अब पहले से कहीं अधिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने गौण खनिज नियमों में व्यापक संशोधन करते हुए नए नियम लागू कर दिए हैं। मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद लागू हुए इन प्रावधानों का उद्देश्य अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाना, राजस्व में वृद्धि करना तथा खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक एवं पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करना है।
सरकार के इस फैसले को अवैध खनन के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" नीति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। नए नियमों के तहत अवैध खनिज परिवहन, उत्खनन और भंडारण करने वालों पर आर्थिक दंड का बोझ कई गुना बढ़ा दिया गया है।
अवैध परिवहन पर अब भारी जुर्माना
नए नियमों के अनुसार किसी भी मामले में समझौता राशि (प्रशमन शुल्क) 25 हजार रुपये से कम नहीं होगी। अवैध खनिज परिवहन के मामलों में अब प्रति टन 2 हजार रुपये की दर से प्रशमन शुल्क वसूला जाएगा। इसके अलावा अवैध रूप से परिवहन किए जा रहे खनिज का पूरा बाजार मूल्य भी अलग से जमा करना होगा।
उदाहरण के तौर पर यदि कोई वाहन 35 टन खनिज का अवैध परिवहन करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे केवल प्रशमन शुल्क के रूप में 70 हजार रुपये का भुगतान करना होगा। इसके अतिरिक्त परिवहन किए जा रहे खनिज का मूल्य भी अलग से देना पड़ेगा। वहीं ट्रैक्टर से अवैध रेत परिवहन करने पर भी न्यूनतम 25 हजार रुपये का दंड और रेत का मूल्य देना अनिवार्य होगा।
वाहन छुड़ाने के लिए जमा करनी होगी सुरक्षा राशि
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अवैध खनन में पकड़े गए वाहन और मशीनें दोबारा अपराध में इस्तेमाल न हो सकें। अब जब्त वाहन, मशीनरी या अन्य सामग्री को सुपुर्दगी पर लेने से पहले संबंधित न्यायालय में वाहन के प्रकार के अनुसार 50 हजार रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक की सुरक्षा राशि जमा करनी होगी। सुरक्षा राशि जमा होने के बाद ही वाहन मालिक को सुपुर्दगी मिल सकेगी।
विकास कार्यों के लिए आसान हुए नियम
सरकार ने शासकीय निर्माण कार्यों को गति देने के उद्देश्य से उत्खनन अनुज्ञापत्र के नियमों में भी राहत दी है। अब शासकीय निर्माण कार्यों के लिए उत्खनन क्षेत्र की सीमा 1 हेक्टेयर से बढ़ाकर 2 हेक्टेयर कर दी गई है। वहीं अनुज्ञापत्र की अवधि 2 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष कर दी गई है। इससे सड़क, भवन और अन्य विकास कार्यों के लिए आवश्यक खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
खनिज अन्वेषण न्यास की स्थापना
खनिजों के वैज्ञानिक अन्वेषण और आधारभूत संरचना विकास को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य खनिज अन्वेषण न्यास-2025 की स्थापना की है। अब गौण खनिजों से प्राप्त रॉयल्टी का 2 प्रतिशत हिस्सा इस न्यास में जमा होगा। सरकार का अनुमान है कि इससे हर वर्ष लगभग 5.25 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि प्राप्त होगी, जिसका उपयोग खनिज क्षेत्र के विकास और शोध कार्यों में किया जाएगा।
खनन पट्टों का समामेलन हुआ आसान
नए संशोधनों के तहत खनन पट्टों के समामेलन (मर्जर) की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है। इससे विभिन्न प्रकार की स्वीकृत खदानों के एकीकरण में आने वाली व्यवहारिक कठिनाइयों का समाधान होगा तथा शासन को प्रीमियम राशि प्राप्त करने में सुविधा मिलेगी।
रॉयल्टी कटौती की व्यवस्था हुई एक समान
निर्माण विभागों में खनिज रॉयल्टी कटौती की व्यवस्था को भी एक समान कर दिया गया है। अब सभी विभाग खनिज की कीमत के साथ रॉयल्टी, जिला खनिज न्यास (DMF), पर्यावरण उपकर, अधोसंरचना उपकर तथा सुरक्षा राशि निर्धारित नियमों के अनुसार काटेंगे। खनिज विभाग से रॉयल्टी क्लीयरेंस मिलने पर यह राशि वापस कर दी जाएगी, अन्यथा इसे खनिज मद में जमा किया जाएगा। इससे अवैध स्रोतों से खनिजों की खरीद और उपयोग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
जिला पंचायतों को भी मिलेगा राजस्व का लाभ
सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए गौण खनिजों से मिलने वाले राजस्व में अब जिला पंचायतों को भी हिस्सेदारी देने का प्रावधान किया है। इससे पहले यह लाभ मुख्य रूप से नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों और जनपद पंचायतों तक सीमित था।
30 साल बाद बढ़ी डेड रेंट की दरें
करीब तीन दशक बाद राज्य सरकार ने खदानों के डेड रेंट (अनिवार्य भाटक) की दरों में भी वृद्धि की है। प्रदेश में 1900 से अधिक गौण खनिज खदानें हैं, जिनमें बड़ी संख्या में खदानें लंबे समय से निष्क्रिय पड़ी हुई हैं। सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई डेड रेंट दरों के बाद केवल गंभीर और सक्रिय पट्टाधारी ही खदानों का संचालन करेंगे। निष्क्रिय खदानों के समर्पण के बाद उन्हें पुनः नीलामी के लिए उपलब्ध कराया जा सकेगा।
अवैध खनन पर लगेगी लगाम, बढ़ेगा राजस्व
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर किए गए इन संशोधनों को खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि नए नियमों से अवैध खनन और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित होगा, राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी तथा खनिज संसाधनों के दोहन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी। साथ ही विकास कार्यों के लिए आवश्यक खनिजों की उपलब्धता भी बेहतर ढंग से हो सकेगी।