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रायपुर। राज्य सरकार ने सुशासन तिहार शुरू होने से पहले लंबित राजस्व प्रकरणों सहित अन्य मामलों के निपटारे के लिए 30 अप्रैल तक की समय-सीमा तय की है। अब जिला प्रशासन और कलेक्टरों के सामने बड़ी चुनौती यह है कि अगले 12 दिनों में प्रदेशभर में लंबित 93 हजार से अधिक राजस्व प्रकरणों का किस तरह समाधान किया जाए। औसतन देखा जाए तो प्रशासन को प्रतिदिन करीब 7700 मामलों का निपटारा करना होगा।
सरकार का मानना है कि सुशासन तिहार के दौरान आम लोगों की सबसे अधिक शिकायतें जमीन, नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन से जुड़े मामलों को लेकर सामने आती हैं। ऐसे में अधिकारियों को पहले से लंबित प्रकरणों को तेजी से निपटाने के निर्देश दिए गए हैं ताकि शिविरों में लोगों को राहत मिल सके।
मुख्यमंत्री करेंगे औचक निरीक्षण
अभियान के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय विभिन्न जिलों का दौरा कर विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन का औचक निरीक्षण करेंगे। मुख्यमंत्री हितग्राहियों से सीधे फीडबैक भी लेंगे। जिला मुख्यालयों में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर समाधान शिविरों में प्राप्त आवेदनों के निराकरण और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
इसके अलावा मंत्री, सांसद, विधायक, मुख्य सचिव और प्रभारी सचिव भी समय-समय पर शिविरों में शामिल होकर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे और लंबित मामलों के निपटारे की स्थिति पर नजर रखेंगे।
दुर्ग में सबसे ज्यादा लंबित मामले
प्रदेश में सबसे अधिक लंबित राजस्व प्रकरण दुर्ग जिले में 9296 हैं। इसके बाद रायपुर में 5182, बिलासपुर में 4920, रायगढ़ में 4884 और राजनांदगांव में 3960 प्रकरण लंबित हैं। पूरे राज्य में कुल 93,788 राजस्व प्रकरण लंबित बताए गए हैं।
इनमें नामांतरण के 24,143, बंटवारे के 7534 और सीमांकन के 5372 मामले शामिल हैं। प्रशासन के लिए चुनौती यह भी है कि भूमि विवाद से जुड़े मामलों में त्वरित फैसला लेना आसान नहीं होता, क्योंकि इनमें दस्तावेजों की जांच और दोनों पक्षों की सुनवाई जरूरी होती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रहेगा ज्यादा फोकस
सुशासन तिहार के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व और भूमि विवादों पर लोगों का फोकस सबसे ज्यादा रहता है। ऐसे में सरकार चाहती है कि शिविरों में लोगों को त्वरित राहत मिले और लंबे समय से अटके मामलों का समाधान हो सके। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन तय समय के भीतर इस बड़ी चुनौती को किस हद तक पूरा कर पाता है।