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रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्नातक (UG) के बाद अब स्नातकोत्तर (PG) स्तर पर भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग इस सत्र से प्रदेश के सभी सरकारी और निजी कॉलेजों में इसे अनिवार्य रूप से लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, पीजी स्तर पर एनईपी लागू होने से पाठ्यक्रम पहले की तुलना में अधिक लचीले और रोजगारोन्मुख बनेंगे। नई व्यवस्था के तहत छात्रों को मल्टीडिस्पिलनरी शिक्षा जिसमें छात्र अपने मुख्य विषय के साथ अन्य विषयों का चुनाव भी कर सकेंगे। पढ़ाई के दौरान अर्जित किए गए क्रेडिट्स डिजिटल लॉकर में सुरक्षित रहेंगे।
छात्रों को पाठ्यक्रम के बीच में पढ़ाई छोड़ने या दोबारा शुरू करने की सुविधा मिलेगी।
नई शिक्षा नीति के तहत पीजी के पाठ्यक्रमों में भारतीय ज्ञान परंपरा (Indian Knowledge System) को विशेष रूप से शामिल किया जा रहा है। इसके जरिए छात्रों को प्राचीन भारतीय गणित, खगोल विज्ञान, आयुर्वेद, धातु विज्ञान और कौटिल्य के अर्थशास्त्र जैसे विषयों का आधुनिक संदर्भों में अध्ययन कराया जाएगा। इसका उद्देश्य छात्रों को उनकी जड़ों से जोड़ते हुए नैतिक मूल्यों का विकास करना है।
उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा आगामी 7 मई को एक उच्च स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक लेंगे। इस बैठक में 17 महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा होगी, जिनमें प्रमुख हैं।
1. पीजी स्तर पर एनईपी लागू करने की अंतिम रूपरेखा।
2. सहायक प्राध्यापकों और प्राध्यापकों की नई भर्ती प्रक्रिया।
3. कॉलेजों में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति की निगरानी।
4. नया शैक्षणिक कैलेंडर और प्रशासनिक तैयारियां।
वर्तमान में छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा का नेटवर्क काफी व्यापक है, जहां एनईपी को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाना है।
शासकीय विश्वविद्यालय: 09
संबद्ध सरकारी कॉलेज: 343
निजी कॉलेज: 326
ऑटोनोमस (स्वायत्त) कॉलेज: 08
रायपुर के साइंस कॉलेज जैसे स्वायत्त संस्थानों में पीजी स्तर पर एनईपी के सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद अब इसे पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जा रहा है।