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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में राज्य जीएसटी विभाग ने फर्जी बिलिंग और कर चोरी के एक बड़े मामले का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि मेसर्स आदेश्वर ट्रेड लिंक नामक फर्म ने महज छह महीनों के भीतर 76 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दर्शाया, लेकिन इस कारोबार के समर्थन में कोई ठोस और विश्वसनीय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकी।
विभागीय जांच में पाया गया कि फर्म द्वारा दिखाए गए अधिकांश लेन-देन केवल कागजों तक सीमित थे। जीएसटी रिटर्न, खरीद-बिक्री रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच के दौरान करीब 8.22 करोड़ रुपये की इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) संदिग्ध पाई गई। अधिकारियों का मानना है कि बिना वास्तविक माल खरीदे ही टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया, जिससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान की आशंका है।
मामले में कार्रवाई करते हुए राज्य जीएसटी विभाग ने बुधवार को फर्म संचालक आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद 14 दिनों की कस्टोडियल रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
पश्चिम बंगाल की संदिग्ध कंपनियों से जुड़े तार
जांच में खुलासा हुआ कि फर्म ने पश्चिम बंगाल की कई संदिग्ध कंपनियों से आयरन एवं स्टील की खरीद के करोड़ों रुपये के बिल प्राप्त किए थे। हालांकि, इन खरीदों के समर्थन में माल की वास्तविक डिलीवरी, परिवहन या भंडारण से जुड़े कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले।
अधिकारियों के अनुसार, इन्हीं फर्जी बिलों के आधार पर आईटीसी का लाभ लिया गया और बाद में अन्य करदाताओं को भी इसका फायदा पहुंचाया गया। जांच के दौरान यह भी पाया गया कि जिन सप्लायर फर्मों से खरीद दर्शाई गई थी, उनमें से अधिकांश के जीएसटी पंजीकरण पहले ही निरस्त हो चुके हैं और उनके वास्तविक कारोबार के भी विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।
फर्जी बिलिंग नेटवर्क का हिस्सा होने की आशंका
राज्य कर विभाग को आशंका है कि यह मामला केवल एक फर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े फर्जी बिलिंग और बोगस आईटीसी नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कई फर्मों का संचालन केवल फर्जी बिल जारी करने और गलत तरीके से टैक्स क्रेडिट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा था।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि अब बैंक खातों, ई-वे बिल, परिवहन दस्तावेजों तथा संबंधित व्यापारिक संस्थानों की विस्तृत जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में कई अन्य व्यक्तियों और फर्मों के भी इस नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
कर चोरी करने वालों पर जारी रहेगी कार्रवाई
राज्य जीएसटी विभाग ने स्पष्ट किया है कि ईमानदार करदाताओं के हितों की रक्षा करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। फर्जी बिलिंग, बोगस आईटीसी और कर चोरी के मामलों में शामिल लोगों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
विभाग का मानना है कि आगे की जांच में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों और वित्तीय लेन-देन के संबंध में और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।