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रायपुर। छत्तीसगढ़ में राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव का ऐलान कर दिया गया है। विधानसभा में संख्या बल को देखते हुए एक सीट कांग्रेस के और दूसरी भाजपा के खाते में जाने की संभावना है। इसके बीच भाजपा ने सक्रिय कदम उठाते हुए संभावित उम्मीदवारों का पैनल तैयार कर लिया है, जबकि कांग्रेस अभी तक सिर्फ चर्चाओं तक सीमित है।
भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए सात नामों का पैनल तैयार किया है जिसमें विभिन्न वर्गों के नेताओं को शामिल किया गया है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री आदिवासी वर्ग से हैं, इसलिए माना जा रहा है कि राज्यसभा में अन्य वर्गों के नेताओं को मौका मिलेगा।
भाजपा पैनल में शामिल नाम इस प्रकार हैं:
अनुसूचित जाति (SC): पूर्व मंत्री कृष्णमूर्ति बांधी, पूर्व विधायक नवीन मारकंडेय, गंगूराम बघेल की पुत्री किरण बघेल।
सामान्य वर्ग: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल, प्रबल प्रताप जूदेव, वरिष्ठ नेता सरोज पांडेय (पूर्व में भी राज्यसभा सदस्य रह चुकी हैं)।
पिछड़ा वर्ग (OBC): पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण सिंह चंदेल।
भाजपा का यह पैनल हाईकमान को भेजा जाएगा, जो दिल्ली से अंतिम उम्मीदवारों का ऐलान करेगा। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पार्टी हरियाणा की तर्ज पर राज्यसभा चुनाव में पहले ही स्पष्ट रणनीति तैयार कर रही है।
वहीं कांग्रेस में अभी तक पैनल की घोषणा नहीं हुई है। हालांकि, पार्टी के भीतर संभावित दावेदारों के नाम सियासी हवा में तैर रहे हैं। इनमें शामिल हैं:
पूर्व मंत्री और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम – आदिवासी समुदाय।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत– OBC वर्ग।
पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव – सामान्य वर्ग।
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत।
मौजूदा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज।
इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया है कि वे राज्यसभा चुनाव में भाग नहीं लेंगे। उन्होंने कहा, “मैं विधायक और राष्ट्रीय महासचिव हूं, इसलिए राज्यसभा की दौड़ में नहीं हूं।”
राज्यसभा उम्मीदवारों के नाम का ऐलान दिल्ली से ही किया जाएगा। छत्तीसगढ़ की भाजपा और कांग्रेस संगठन अपने-अपने पैनल तैयार कर हाईकमान को भेजेंगे। इस बार भाजपा कांग्रेस की तुलना में इस मामले में आगे दिख रही है।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा की तैयारियों और स्पष्ट रणनीति के कारण कांग्रेस को अपने दावेदारों के नाम तय करने में जल्दबाजी करनी पड़ सकती है। राज्यसभा चुनाव में आदिवासी, OBC और सामान्य वर्ग का संतुलन बनाए रखना दोनों पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण होगा।