

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

durg ceo rupesh pandey suspended chhattisgarh
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल सामने आई है। जनसमस्या निवारण शिविर में आम नागरिकों से कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करने के आरोप में जनपद पंचायत दुर्ग के सीईओ (CEO) रूपेश कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
हालांकि, इस निलंबन के बाद खुद अधिकारी रूपेश पाण्डेय ने सामने आकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं और इसे अपने खिलाफ एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश और षड्यंत्र करार दिया है।
मामला ग्राम थनौद में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर का है। शिविर के दौरान सीईओ रूपेश कुमार पाण्डेय और एक व्यक्ति के बीच तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। वीडियो सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच बैठाई।
जांच रिपोर्ट में शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही और नागरिकों के प्रति अशिष्ट व्यवहार को प्रथम दृष्टया सही पाया गया। इसके बाद 30 मई को अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। संभाग आयुक्त (कमिश्नर) कार्यालय ने उनके जवाब को असंतोषजनक मानते हुए आखिरकार निलंबन का आदेश जारी कर दिया। फिलहाल, जनपद पंचायत दुर्ग के CEO का अतिरिक्त प्रभार महेंद्र कुमार जांगड़े को सौंपा गया है।
"मेरे खिलाफ हुआ है बड़ा षड्यंत्र" — निलंबित CEO रूपेश पाण्डेय का पलटवार
निलंबन की इस एकपक्षीय कार्रवाई पर पत्रकार से बातचीत करते हुए निलंबित सीईओ रूपेश कुमार पाण्डेय ने अपना पक्ष रखा और मामले में एक नया मोड़ ला दिया। उन्होंने कहा - "जिस व्यक्ति (पुरान देशमुख) से मेरा विवाद हुआ, वह भाजपा का पदाधिकारी है। उसकी पत्नी 2015 से 2020 तक सरपंच थीं और उनके खिलाफ ₹2,40,105 की सरकारी राशि की वसूली का मामला 2021 से एसडीएम कोर्ट में लंबित है। इसके अलावा, खुद पुरान देशमुख के खिलाफ शिक्षा विभाग की स्कूल भूमि की नीलामी के ₹75,000 बकाया हैं, जिसका उसने चेक दिया था और वह बाउंस हो गया। दोनों पति-पत्नी पर कुल 3.25 लाख रुपये की वसूली बकाया है, जिसे रफा-दफा (अपास्त) कराने के लिए वह मुझ पर दबाव बना रहा था।" “सोशल मीडिया पर जो वीडियो दिखाया जा रहा है, वह सिर्फ 7 सेकंड का है और उसमें केवल एक ही पक्ष दिख रहा है। असल में वह 55 सेकंड का वीडियो है, जिसमें वह व्यक्ति पहले बदतमीजी कर रहा था। मैंने बहुत धैर्य से कहा कि तमीज से बात करो। वह लगातार गंदी भाषा का प्रयोग कर रहा था ताकि मेरा धैर्य टूट जाए। यह सिर्फ क्रिया की प्रतिक्रिया थी, मैंने कोई अशिष्टता नहीं की।”
उन्होंने कहा- “यह पूरी तरह से प्री-प्लांड था। विधायक जी के सामने वह ऐसी भाषा का उपयोग कर रहा था और विधायक जी चुप थे, उन्होंने उसे नहीं रोका। 16 मई से ही सोशल मीडिया पर किसी और की पदस्थापना को लेकर एक पत्र चल रहा है। अगर आप इन कड़ियों को जोड़ेंगे, तो समझ आ जाएगा कि यह एक षड्यंत्र है। कमिश्नर साहब ने एकपक्षीय कार्रवाई की है। मैं इस फैसले के खिलाफ चीफ सेक्रेटरी (मुख्य सचिव) के पास अपील करूँगा और हमारे लिए हाई कोर्ट का दरवाजा भी खुला है।”
जब पत्रकार ने उनसे पूर्व मुख्यमंत्री से मुलाकात को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि वे पाटन के सीईओ रह चुके हैं, इसलिए यह सिर्फ एक औपचारिक भेंट थी। वहीं, अपने साथी अधिकारियों पर तंज कसते हुए रूपेश पाण्डेय ने कहा, “निलंबन के बाद किसी अधिकारी का फोन नहीं आया। हमारे विभाग में इतने साहसी अधिकारी नहीं हैं जो सस्पेंड होने के बाद किसी को फोन कर सकें।