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durg collector bans land sale 18 villages dedicated freight corridor
दुर्ग। दुर्ग जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रेलवे की एक बड़ी परियोजना के लिए दुर्ग और पाटन तहसील के 18 गांवों की करीब 326 एकड़ जमीन का अधिग्रहण (लिया जाना) किया जाना है। इसे देखते हुए दुर्ग कलेक्टर ने इन सभी 18 गांवों में जमीन की खरीदी-बिक्री, खाता विभाजन (बंटवारा) और व्यपवर्तन (डायवर्सन) पर तत्काल प्रभाव से अस्थाई रोक लगा दी है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
दरअसल, भारत सरकार के रेल मंत्रालय के अधीन 'डेडीकेटेड फ्रेट कारीडोर कॉपोर्रेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड' (DFCCIL) द्वारा यहां East-West Dedicated Freight Corridor (दनकुनी-सूरत) परियोजना का निर्माण किया जाना है।
अक्सर देखा गया है कि ऐसी बड़ी परियोजनाओं की घोषणा होते ही बिचौलिए और भू-माफिया सक्रिय हो जाते हैं। वे सीधे-साधे किसानों और मूल भूस्वामियों से कम दामों में जमीन खरीदकर या उसके छोटे-छोटे टुकड़े कर शासन से ज्यादा मुआवजा ऐंठने की कोशिश करते हैं। इससे न केवल असली जमीन मालिकों का नुकसान होता है, बल्कि सरकारी पैसे की बर्बादी होती है और कोर्ट-कचहरी के मामले बढ़ने से प्रोजेक्ट में भी देरी होती है। इसी गड़बड़ी को रोकने और ग्रामीणों के हितों की रक्षा के लिए कलेक्टर ने यह कड़ा कदम उठाया है।
इन 18 गांवों में लागू हुआ प्रतिबंध:
कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, दुर्ग और पाटन तहसील के निम्नलिखित गांवों की सरकारी और निजी भूमि इस परियोजना से प्रभावित हो रही है।
दुर्ग तहसील के 12 गांव: बिरेझर, चंगोरी, कोनारी, चंदखुरी, हनोदा, खम्हरिया, उमरपोटी, उतई, डुमरडीह, सिरसाकला और परसदा (पाहंदा)।
पाटन तहसील के 7 गांव: परेवाडीह, पहडोर, सोमनी, औंधी, मगरघटा, बेन्द्री और पथरीडीह।

