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दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की कमी को लेकर छात्र-छात्राओं का आक्रोश सामने आया है। जिले के दो अलग-अलग स्वामी आत्मानंद स्कूलों में मंगलवार को विद्यार्थियों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। पेंड्रावन के आत्मानंद स्कूल के करीब 400 छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों की कमी को लेकर खैरागढ़-धमधा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम किया, वहीं सेलूद के स्वामी आत्मानंद स्कूल के 203 विद्यार्थियों ने टॉयलेट और बाउंड्रीवॉल की मांग को लेकर स्कूल गेट पर तालाबंदी करने के बाद दुर्ग-पाटन मुख्य मार्ग पर करीब एक घंटे तक चक्काजाम किया।
पेंड्रावन स्कूल में 400 विद्यार्थियों पर सिर्फ 3 शिक्षक
पेंड्रावन के स्वामी आत्मानंद स्कूल में कक्षा 9वीं से 12वीं तक करीब 400 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। विद्यार्थियों का आरोप है कि स्कूल में उनके मुकाबले शिक्षकों की संख्या बेहद कम है। स्कूल में फिलहाल तीन शिक्षक और एक प्राचार्य होने की बात सामने आई है, जबकि विद्यार्थियों के अनुसार बेहतर पढ़ाई के लिए कम से कम 17 शिक्षकों की आवश्यकता है।
छात्रों का कहना है कि शिक्षकों की कमी के कारण कई विषयों की नियमित कक्षाएं नहीं लग पा रही हैं और उनका पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है। इसका सीधा असर उनकी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर पड़ रहा है।
21 अगस्त के बाद भी नहीं बनी बात, फिर सड़क पर उतरे छात्र
शिक्षकों की कमी को लेकर पेंड्रावन स्कूल के विद्यार्थियों ने 21 अगस्त को भी प्रदर्शन और चक्काजाम किया था। उस दौरान प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे और विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को सुना था।
विद्यार्थियों को उम्मीद थी कि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई होगी और स्कूल में शिक्षकों की कमी दूर की जाएगी। हालांकि, 25 अगस्त तक उनकी मुख्य मांग पूरी नहीं होने पर छात्रों ने मंगलवार को दोबारा खैरागढ़-धमधा मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया।
छात्रों का कहना है कि वे पढ़ाई छोड़कर सड़क पर बैठना नहीं चाहते, लेकिन जब स्कूल में पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे तो उनका भविष्य प्रभावित होगा। उनका आंदोलन किसी राजनीतिक मुद्दे को लेकर नहीं, बल्कि शिक्षा और भविष्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर है।
कुछ मांगें पूरी, लेकिन आर्ट्स-कॉमर्स के शिक्षकों की मांग पर अड़े छात्र
प्रदर्शन के बीच विद्यार्थियों की कुछ मांगों पर कार्रवाई की गई है। स्कूल में ओपन स्कूल की व्यवस्था खत्म कर दी गई है और तीन अतिरिक्त शिक्षकों की व्यवस्था किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा स्कूल के प्राचार्य को भी हटाया गया है।
इसके बावजूद छात्र-छात्राएं पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। वे विशेष रूप से आर्ट्स और कॉमर्स विषय के शिक्षकों की मांग कर रहे हैं। विभाग की ओर से कॉमर्स के एक शिक्षक की व्यवस्था जल्द किए जाने की बात कही गई है।
विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल में पहले से ही शिक्षकों की कमी है और उपलब्ध शिक्षकों को ओपन स्कूल की जिम्मेदारी में लगाने से नियमित विद्यार्थियों की पढ़ाई और ज्यादा प्रभावित होती है। इसलिए वे चाहते हैं कि स्कूल में पर्याप्त संख्या में नियमित शिक्षक उपलब्ध कराए जाएं।
शिक्षा मंत्री के गृह जिले में प्रदर्शन
पेंड्रावन स्कूल दुर्ग जिले के धमधा क्षेत्र में आता है। दुर्ग जिला प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का गृह जिला भी है। ऐसे में जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर विद्यार्थियों के सड़क पर उतरने से शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल में शिक्षक उपलब्ध कराना शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। उन्हें अपनी पढ़ाई के लिए बार-बार सड़क पर उतरकर मांग रखने की स्थिति नहीं आनी चाहिए।
सेलूद स्कूल में 203 बच्चों ने की तालाबंदी
दूसरी ओर, दुर्ग जिले के सेलूद स्थित स्वामी आत्मानंद स्कूल में भी विद्यार्थियों ने बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर आंदोलन किया। यहां कक्षा 6वीं से 8वीं तक करीब 203 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं।
विद्यार्थियों ने टॉयलेट और बाउंड्रीवॉल की मांग को लेकर पहले स्कूल के मुख्य गेट पर तालाबंदी की। इसके बाद छात्र-छात्राएं दुर्ग-पाटन मुख्य मार्ग पर पहुंच गए और करीब एक घंटे तक चक्काजाम किया।
दो साल से टॉयलेट नहीं होने का आरोप
विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल में पिछले करीब दो साल से टॉयलेट की सुविधा नहीं है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी छात्राओं को होती है। छात्राओं ने सवाल उठाया कि यदि स्कूल में शौचालय की सुविधा ही नहीं है तो वे खुले में कहां जाएंगी।
छात्रा किंजल कुर्रे ने कहा कि लड़कियों के लिए स्कूल में शौचालय की सुविधा बेहद जरूरी है। लगातार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर विद्यार्थियों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
बाउंड्रीवॉल नहीं होने से साइकिलों को नुकसान
विद्यार्थियों ने स्कूल परिसर में बाउंड्रीवॉल नहीं होने की समस्या भी उठाई। उनका कहना है कि स्कूल परिसर की सुरक्षा के लिए चारदीवारी नहीं होने के कारण बाहरी लोगों की आवाजाही बनी रहती है। विद्यार्थियों का आरोप है कि स्कूल परिसर में खड़ी साइकिलों के टायर बाहर से आने वाले लोग पंचर कर देते हैं।
छात्रों की मांग है कि स्कूल परिसर में जल्द से जल्द बाउंड्रीवॉल का निर्माण कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों और उनकी साइकिलों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर दिया आश्वासन
सेलूद स्कूल में विद्यार्थियों के प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं से चर्चा कर उनकी समस्याओं को सुना और समाधान का आश्वासन दिया।
विभाग की ओर से बताया गया कि संबंधित शासन योजना के तहत स्कूल में जरूरी निर्माण कार्यों के लिए ऑनलाइन प्रस्ताव पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा वैकल्पिक व्यवस्था के लिए स्कूल के प्राचार्य को राशि जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।
छात्रों का सवाल- पढ़ाई और बुनियादी सुविधाएं आखिर कब?
दुर्ग जिले के दोनों स्कूलों में विद्यार्थियों के आंदोलन ने सरकारी स्कूलों में शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पेंड्रावन में जहां विद्यार्थी पर्याप्त शिक्षकों की मांग कर रहे हैं, वहीं सेलूद में बच्चे टॉयलेट और बाउंड्रीवॉल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हुए।
विद्यार्थियों का कहना है कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक, शौचालय और सुरक्षित परिसर जैसी सुविधाएं मिलना उनका अधिकार है। वे नियमित रूप से पढ़ाई करना चाहते हैं और अपना भविष्य बेहतर बनाना चाहते हैं। ऐसे में उनकी मांग है कि प्रशासन केवल आश्वासन तक सीमित न रहे, बल्कि स्कूलों की समस्याओं का जल्द स्थायी समाधान किया जाए।