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नई दिल्ली। देश में जहां एक तरफ मानसून रफ्तार पकड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ मौसम को लेकर एक चिंताजनक वैश्विक रिपोर्ट सामने आई है। यूरोपीय मौसम एजेंसी ने पुष्टि की है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित हो रही है। यूरोपीय मध्यम-श्रेणी मौसम पूर्वानुमान केंद्र के ताजा आंकड़ों के अनुसार, उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र ने उस महत्वपूर्ण तापमान सीमा को पार कर लिया है, जो अल नीनो की शुरुआत का संकेत देती है।
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अल नीनो के प्रभाव के कारण इस साल दिसंबर तक प्रशांत महासागर के इलाके में समुद्री सतह का तापमान औसत से 5.4 डिग्री फारेनहाइट (3 डिग्री सेल्सियस) तक बढ़ सकता है।
इस साल का अल नीनो 1997-1998 और 2015-2016 के पिछले रिकॉर्ड अल नीनो से भी ज्यादा शक्तिशाली हो सकता है। वैश्विक मौसम विज्ञानी बेन नोल के अनुसार, हर अनुमान तापमान +3 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जाने की ओर इशारा कर रहा है, जबकि कुछ अनुमानों में तो यह +4 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा दिखाई दे रहा है।
देश के भीतर मानसून की चाल अच्छी बनी हुई है। मौसम विभाग (IMD) से प्राप्त ताजा जानकारी के अनुसार
दक्षिण-पश्चिम मानसून गोवा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में पहुंच चुका है। देश के पश्चिमी तटों पर मानसून की रफ्तार बेहतरीन रहने की उम्मीद है। केरल में भारी बारिश का दौर जारी है। राज्य के 5 जिलों में 'रेड अलर्ट' जारी किया गया है, जिसका मतलब है कि अगले 24 घंटों में वहां 20 सेंटीमीटर से अधिक बारिश हो सकती है।
केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में अगले 7 दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं, ओडिशा के भुवनेश्वर में तेज आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश दर्ज की गई है।
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के लिए भी राहत की खबर है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के अगले पांच दिनों में छत्तीसगढ़ और ओडिशा के कुछ हिस्सों में पहुंचने का अनुमान है।
हर साल बस्तर में मानसून की एंट्री 12 जून के आसपास होती है। इस बार भी अनुमान है कि अगले 5 दिनों में मानसून सक्रिय होकर बस्तर में प्रवेश कर जाएगा।
लोकल वेदर सिस्टम के कारण शनिवार को छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। सक्ती जिले के चंद्रपुर में सर्वाधिक 20 मिमी, गरियाबंद के देवभोग में 10 मिमी और बस्तर व नवागढ़ में 10-10 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, वर्तमान में छत्तीसगढ़ के मौसम को प्रभावित करने वाले तीन प्रमुख सिस्टम काम कर रहे हैं।
उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर एक चक्रवातीय परिसंचरण (Cyclonic Circulation) बना हुआ है। झारखंड और उसके आसपास के क्षेत्रों में एक अन्य वेदर सिस्टम सक्रिय है। झारखंड से छत्तीसगढ़ होते हुए तेलंगाना तक एक द्रोणिका (Trough) बनी हुई है, जिसके प्रभाव से आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव और बारिश देखने को मिलेगी।