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रायपुर– 19 वर्षों के संघर्ष और सुरक्षा बलों की कड़ी सतर्कता के बाद गरियाबंद जिला माओवाद के साये से पूरी तरह मुक्त होने की ओर बढ़ रहा है। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी शेष है, लेकिन हालिया सुरक्षा समायोजन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने राजिम विधायक रोहित साहू और बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक ध्रुव से चार-चार सीएएफ गार्ड और फॉलो वाहन की सुरक्षा वापस ले ली है। साथ ही, बिंद्रानवागढ़ के पूर्व विधायक डमरूधर पुजारी को दिया गया फॉलो वाहन भी वापस किया गया। इस कदम से सुरक्षा बलों पर दबाव कम होगा और सरकारी खजाने को हर महीने लाखों रुपये की बचत होगी।
आर्थिक रूप से देखें तो एक विधायक की सुरक्षा, फॉलो वाहन के रखरखाव और ईंधन पर शासन को प्रतिमाह लगभग 2.50 लाख रुपये खर्च करने पड़ते थे। सुरक्षा में इस बदलाव को जिले में विकास और शांति की बढ़ती स्थिति का संकेत माना जा रहा है।
गरियाबंद में माओवादी समस्या पर गंभीर कार्रवाई भी हुई है। जनवरी 2025 में कुल्हाड़ी घाट में जवानों ने जयराम उर्फ चलपति समेत 16 माओवादी ढेर किए थे। इसके बाद सितंबर 2025 में मटाल की पहाड़ियों में कार्रवाई में मनोज उर्फ बालकृष्ण सहित 10 माओवादी मारे गए थे। गरियाबंद ऐसा एकमात्र जिला है, जहां माओवादी केंद्रीय कमेटी के दो सदस्य ढेर किए गए।
जिले में यह बदलती तस्वीर इस बात का प्रमाण है कि विकास और शांति की नीति ने भय की राजनीति पर विजय प्राप्त कर ली है।