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ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण मामले में बालिग युवती की इच्छा को सर्वोपरि मानते हुए उसे अपने प्रेमी के साथ रहने की अनुमति दे दी। यह फैसला न्यायमूर्ति आनंद पाठक और पुष्पेंद्र यादव की युगलपीठ ने सुनाया।
मामला तब सामने आया जब अवधेश की ओर से अधिवक्ता सुरेश पाल सिंह गुर्जर ने याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उसकी पत्नी को अनुज नामक युवक ने अवैध रूप से अपने पास रखा हुआ है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने युवती, उसके माता-पिता, पति और कथित प्रेमी सभी को पेश होने के निर्देश दिए।
कोर्ट में पेश हुई युवती ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से अपने प्रेमी के साथ रह रही है। उसने पति और माता-पिता दोनों के साथ रहने से इनकार कर दिया। युवती ने बताया कि उसकी उम्र 19 वर्ष है जबकि उसके पति की उम्र करीब 40 वर्ष है, जिसके चलते वैवाहिक जीवन में सामंजस्य नहीं बन पाया और उसके साथ दुर्व्यवहार भी हुआ।
कोर्ट के निर्देश पर शासकीय अधिवक्ता अंजलि ज्ञानानी ने युवती की काउंसलिंग भी की, लेकिन इसके बाद भी युवती अपने फैसले पर अडिग रही और प्रेमी अनुज के साथ रहने की इच्छा दोहराई। अनुज ने भी कोर्ट में युवती की देखभाल और किसी प्रकार की प्रताड़ना न करने का आश्वासन दिया।
युगलपीठ ने युवती की स्वतंत्र इच्छा को प्राथमिकता देते हुए उसे अपने प्रेमी के साथ रहने की अनुमति प्रदान की। साथ ही, उसकी सुरक्षा और मार्गदर्शन सुनिश्चित करने के लिए अगले छह माह तक दो महिला पुलिसकर्मियों को “शौर्या दीदी” के रूप में नियुक्त करने का निर्देश दिया।