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नई दिल्ली: कर्ज के संकट से जूझ रही जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के भविष्य को लेकर चल रही कानूनी जंग में अदाणी समूह ने बड़ी जीत हासिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने जेएएल के अधिग्रहण के लिए अदाणी समूह की 14,535 करोड़ रुपये की बोली पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह फैसला वेदांता लिमिटेड की उस याचिका पर सुनाया, जिसमें अदाणी की बोली का विरोध किया गया था। वेदांता ने दलील दी थी कि उनकी 17,926 करोड़ रुपये की बोली अदाणी समूह से कहीं अधिक है, इसलिए उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने के बजाय इसे राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) को सौंप दिया है।
खबरों के मुताबिक, जेएएल के लेनदारों (Creditors) ने अदाणी समूह के प्रस्ताव को अधिक व्यावहारिक माना है। इसके पीछे मुख्य कारण अदाणी द्वारा 6,000 करोड़ रुपये का तत्काल नकद भुगतान (Upfront Payment) करने का वादा है। लेनदारों का मानना है कि जेएएल जैसी भारी कर्ज वाली कंपनी के मामले में तत्काल लिक्विडिटी (नकदी) अधिक महत्वपूर्ण है।
जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड पर वर्तमान में कुल 57,185 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज है। कंपनी लंबे समय से दिवालिया प्रक्रिया और लेनदारों के दबाव का सामना कर रही है। ऐसे में इस अधिग्रहण को कंपनी के पुनरुद्धार के लिए आखिरी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है।