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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में 27 दिनों से जारी युद्धजनित तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर भारत सहित अपने मित्र देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति देने की घोषणा की है। इससे फारस की खाड़ी के पश्चिमी हिस्से में फंसे भारतीय जहाजों की आवाजाही फिर से तेज होने की संभावना बढ़ गई है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान के जहाज इस मार्ग से गुजर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका, इज़राइल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए यह मार्ग प्रतिबंधित रहेगा। ईरानी सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत मित्र देशों के जहाजों को समन्वय के साथ नियंत्रित तरीके से गुजरने की अनुमति दी गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश का लगभग 90 प्रतिशत आयातित गैस और 60 प्रतिशत कच्चा तेल इसी मार्ग से आता है। वर्तमान में फारस की खाड़ी में 22 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिनमें लगभग 17 लाख टन ऊर्जा कार्गो लदा है। इसमें 16.7 लाख टन कच्चा तेल, 3.2 लाख टन एलपीजी और 2 लाख टन एलएनजी शामिल हैं। इस समय फारस की खाड़ी में लगभग 500 अंतरराष्ट्रीय टैंकर विभिन्न कारणों से रुके हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि मित्र देशों के जहाजों के लिए मार्ग खुलने से भारतीय ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता बनी रहेगी और तेल-गैस की कीमतों पर स्थिरता आने में मदद मिलेगी।