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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश पुलिस के चर्चित आईपीएस अधिकारी और 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' के तौर पर मशहूर अजय पाल शर्मा की पश्चिम बंगाल चुनाव में तैनाती ने राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है। चुनाव आयोग द्वारा उन्हें दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस पर्यवेक्षक (Police Observer) नियुक्त किए जाने के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) और विपक्षी खेमे के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
अजय पाल शर्मा की तैनाती उस क्षेत्र में की गई है जिसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी का सबसे मजबूत किला माना जाता है। 29 अप्रैल को होने वाले मतदान के मद्देनजर, चुनाव आयोग ने इस संवेदनशील इलाके में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यूपी कैडर के इस सख्त अधिकारी पर भरोसा जताया है।
अपनी तैनाती के तुरंत बाद अजय पाल शर्मा एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने एसएसबी (SSB), एफएसटी (FST) और क्यूआरटी (QRT) की संयुक्त टीम के साथ संवेदनशील इलाकों में छापेमारी शुरू कर दी है।
टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान के समर्थकों द्वारा मतदाताओं को धमकाने की शिकायत मिलने पर अजय पाल शर्मा खुद मौके पर पहुंचे। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में वे सख्त लहजे में कहते दिख रहे हैं कि, "अगर गड़बड़ी हुई तो अच्छे से खबर लेंगे।" इस कार्रवाई पर जहांगीर खान ने फिल्मी अंदाज में चुनौती देते हुए कहा, “पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त।”
तृणमूल कांग्रेस ने अजय पाल शर्मा की कार्यप्रणाली पर कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी का आरोप है कि डायमंड हार्बर क्षेत्र में वह एक विशेष वर्ग को निशाना बना रहे हैं और गैर-कानूनी तरीके से छापेमारी कर रहे हैं। टीएमसी नेताओं ने तंज कसते हुए यहाँ तक कह दिया कि, “भाजपा को उन्हें आधिकारिक तौर पर पार्टी ज्वाइन करा देनी चाहिए।”
कौन हैं अजय पाल शर्मा?
2011 बैच के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा उत्तर प्रदेश में अपनी सख्त छवि के लिए जाने जाते हैं। शामली, नोएडा, जौनपुर और रामपुर जैसे जिलों में तैनाती के दौरान उन्होंने अपराधियों के खिलाफ कड़े अभियान चलाए। उन्हें 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' और यूपी का 'सिंघम' कहा जाता है। हालांकि, उनकी कार्यशैली को लेकर अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता पहले भी सवाल उठा चुके हैं।