

Copyright © 2026 rights reserved by Inkquest Media
अन्य समाचार

lt gen dheeraj seth appointed next indian army chief
नई दिल्ली। देश को नया सैन्य प्रमुख मिल गया है। लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ देश के अगले आर्मी चीफ (थल सेनाध्यक्ष) होंगे। रक्षा मंत्रालय ने शनिवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की। वर्तमान में सेना के उप प्रमुख (वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) के पद पर तैनात लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ आगामी 30 जून को मौजूदा सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी के सेवानिवृत्त होने के बाद यह सर्वोच्च पदभार संभालेंगे।
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ की इस सर्वोच्च पद पर नियुक्ति से छत्तीसगढ़ में भी खुशी की लहर है, क्योंकि उनका इस राज्य से बेहद गहरा और भावुक नाता है।
उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) कृष्ण मोहन सेठ (के.एम. सेठ) छत्तीसगढ़ के दूसरे राज्यपाल रह चुके हैं।
के.एम. सेठ ने जून 2003 से जनवरी 2007 तक छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के रूप में राज्य को कुशल अभिभावकत्व प्रदान किया था। पिता के कार्यकाल के दौरान धीरज सेठ का रायपुर स्थित राजभवन से गहरा जुड़ाव रहा।
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ राज्य में नक्सलवाद से निपटने के लिए कांकेर में स्थापित 'काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वॉरफेयर कॉलेज' की स्थापना के पीछे भी उनके पिता तत्कालीन राज्यपाल के.एम. सेठ का ही विजन था।
दिसंबर 1986 में आर्म्ड कॉर्प्स (बख्तरबंद रेजिमेंट) में कमीशन हासिल करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर 40 साल लंबा, गौरवशाली और पूरी तरह बेदाग रहा है। वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) खड़कवासला के पूर्व छात्र रहे हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के पास भारतीय सेना की विभिन्न कमानों और रणनीतिक मोर्चों पर काम करने का एक दुर्लभ व अद्वितीय रिकॉर्ड है।
लेफ्टिनेंट जनरल के रूप में उन्होंने भारतीय सेना की प्रमुख आक्रामक फॉर्मेशन "सुदर्शन चक्र कॉर्प्स" का नेतृत्व किया है। यह सेना की एक आक्रामक स्ट्राइक फॉर्मेशन है, जिसका मुख्य काम युद्ध के समय दुश्मन के इलाके में घुसकर आक्रामक हमला (ऑफेंसिव ऑपरेशन) करना होता है।
उन्होंने रेगिस्तानी इलाके में आर्म्ड रेजिमेंट का नेतृत्व किया है। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिमी थिएटर (पश्चिमी सीमा का वह भौगोलिक इलाका जहां युद्ध लड़ा जाता है) में आर्म्ड ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी बल की कमान भी संभाली है।
सेना कमांडर बनने के बाद, उन्होंने देश की दो अलग-अलग महत्वपूर्ण ऑपरेशनल कमानों दक्षिणी कमान और दक्षिण-पश्चिमी कमान दोनों का नेतृत्व किया। कई साल तक दो अलग-अलग कमान संभालने का उनके पास एक बड़ा और बेहतरीन रिकॉर्ड है।