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रायपुर। महादेव सट्टा ऐप और स्काई एक्सचेंज बेटिंग नेटवर्क से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच लगातार नए खुलासे कर रही है। बुधवार को रायपुर की विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट ने EBIX के चेयरमैन विकास गर्ग को 24 जुलाई तक 10 दिन की ईडी रिमांड पर भेज दिया। एजेंसी का आरोप है कि ऑनलाइन सट्टे से अर्जित अवैध धन को शेल कंपनियों, विदेशी निवेश और कॉर्पोरेट सौदों के जरिए वैध बनाने की कोशिश की गई।
दिल्ली से गिरफ्तारी, रायपुर लाकर कोर्ट में पेश
ईडी की रायपुर जोनल टीम ने मंगलवार को विकास गर्ग को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया। इसके बाद दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड लेकर उन्हें रायपुर लाया गया। बुधवार को विशेष पीएमएलए कोर्ट में पेश किए जाने के बाद अदालत ने 24 जुलाई तक ईडी रिमांड मंजूर कर दी। अब एजेंसी उनसे मनी ट्रेल, विदेशी निवेश और अन्य आरोपियों की भूमिका को लेकर गहन पूछताछ करेगी।
सट्टे के पैसे को विदेशी निवेश के जरिए वैध बनाने का आरोप
ईडी के मुताबिक, महादेव सट्टा ऐप से कमाए गए अवैध धन को पहले शेल कंपनियों के माध्यम से विभिन्न देशों में भेजा गया। इसके बाद Foreign Portfolio Investment (FPI), Foreign Direct Investment (FDI), Foreign Currency Convertible Bonds (FCCBs), Qualified Institutional Placement (QIP) और अन्य निवेश माध्यमों के जरिए भारत में वापस लाकर वैध कारोबारी निवेश के रूप में दिखाया गया।
जांच एजेंसी का दावा है कि दुबई, मॉरीशस, अमेरिका और ब्रिटेन में स्थापित कंपनियों के जरिए यह पूरी वित्तीय श्रृंखला संचालित की गई।
स्काई एक्सचेंज नेटवर्क से जुड़े तार
ईडी के अधिवक्ता सौरभ पांडेय के अनुसार, शुरुआती जांच महादेव ऐप से हुई कमाई और उसकी मनी लॉन्ड्रिंग तक सीमित थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर स्काई एक्सचेंज नेटवर्क का खुलासा हुआ। एजेंसी का आरोप है कि विकास गर्ग ने स्काई एक्सचेंज के कथित संचालक हरीशंकर टिंबरेवाल से जुड़े नेटवर्क के जरिए सट्टे के धन को भारतीय अर्थव्यवस्था में निवेश कराया।
1,175 करोड़ में खरीदी गई अमेरिकी कंपनी EBIX
जांच में सामने आया कि विकास गर्ग की कंपनी Eraaya Lifespaces Ltd. ने अगस्त 2024 में अमेरिका की दिवालिया अदालत की प्रक्रिया के तहत करीब 1,175 करोड़ रुपए में अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी EBIX Inc. की 97.5 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी।
ईडी का आरोप है कि इस अधिग्रहण में इस्तेमाल धन का बड़ा हिस्सा महादेव ऐप से जुड़े कथित अवैध नेटवर्क से आया था।
EBIX खरीदने के लिए कहां से आया पैसा?
ईडी के अनुसार, विकास गर्ग ने पूछताछ में बताया कि EBIX अधिग्रहण के लिए कई स्रोतों से धन जुटाया गया।
- Vikas Lifecare Ltd. से लगभग 300 करोड़ रुपए
- Qualified Institutional Placement (QIP) के जरिए करीब 250 करोड़ रुपए
- Foreign Currency Convertible Bonds (FCCBs) के माध्यम से विदेशी निवेशकों से लगभग 665 करोड़ रुपए
एजेंसी का आरोप है कि FCCBs के जरिए जुटाए गए 665 करोड़ रुपए वास्तव में हरीशंकर टिंबरेवाल से जुड़े विदेशी नेटवर्क द्वारा भेजे गए थे और इसी राशि का उपयोग EBIX खरीदने में किया गया।
बैंक रिकॉर्ड में मिले अहम सबूत
ईडी की जांच में बैंक रिकॉर्ड से पता चला कि अगस्त 2024 में Eraaya Lifespaces के QIP एस्क्रो खाते में विदेशी निवेशकों से 248.50 करोड़ रुपए जमा हुए। बाद में यही राशि कंपनी के मुख्य खाते में स्थानांतरित कर EBIX अधिग्रहण में इस्तेमाल की गई।
इसके अलावा जून और जुलाई 2024 के दौरान Vikas Lifecare Ltd. से 292.41 करोड़ रुपए EBIX सौदे के लिए भेजे गए, जिन्हें कंपनी के रिकॉर्ड में लोन, एडवांस और निवेश के रूप में दर्ज किया गया।
940.77 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच
ईडी ने 10 जुलाई को जारी प्रेस नोट में बताया कि डिजिटल साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड और पीएमएलए की धारा-50 के तहत दर्ज बयानों के आधार पर 765.77 करोड़ रुपए को अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) माना गया है।
इसी आधार पर एजेंसी ने:
- EBIX में Eraaya Lifespaces की 893.03 करोड़ रुपए की हिस्सेदारी
- 47.74 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियां
अस्थायी रूप से अटैच कर दी हैं। कुल अटैच की गई संपत्ति का मूल्य 940.77 करोड़ रुपए बताया गया है।
बयानों में विरोधाभास के बाद हुई गिरफ्तारी
ईडी के मुताबिक, विकास गर्ग को कई बार पूछताछ के लिए नोटिस भेजे गए थे। पूछताछ के दौरान उनके बयानों में विरोधाभास सामने आया और नए डिजिटल एवं वित्तीय साक्ष्य भी मिले। इन्हीं आधारों पर आगे की पूछताछ आवश्यक मानते हुए उन्हें दिल्ली से गिरफ्तार किया गया।
अन्य बयानों का भी सहारा
ईडी ने कारोबारी सुनील भंडारी और कोलकाता के कथित एंट्री ऑपरेटर अमित सारोगी के बयानों का भी हवाला दिया है। एजेंसी का दावा है कि सुनील भंडारी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह कमीशन लेकर FPI, Preferential Allotment और अन्य निवेश माध्यमों के जरिए सूचीबद्ध कंपनियों में निवेश कराता था।
जांच एजेंसी का आरोप है कि विकास गर्ग और हरीशंकर टिंबरेवाल मिलकर शेल कंपनियों और विदेशी निवेश के जरिए ऑनलाइन सट्टे से अर्जित धन को शेयर बाजार और बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियों में निवेश कर वैध बनाने का काम कर रहे थे।