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रायपुर। राजधानी से लगे नकटी गांव में चरागाह की शासकीय जमीन को खाली कराने के लिए सोमवार सुबह प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू किया। प्रस्तावित विधायक आवासीय कॉलोनी निर्माण के लिए चिन्हित करीब 85 मकानों को खाली कराने की कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, अभियान में करीब 4,000 पुलिसकर्मी, 14 बुलडोजर, 250 कोटवार, 300 सदस्यीय प्रहरी दल और 200 अधिकारियों की संयुक्त टीम तैनात की गई है। जिले के सभी पटवारी और राजस्व अधिकारियों की भी ड्यूटी लगाई गई है। सुबह चार बजे से ही अलग-अलग टीमें गांव पहुंचकर चिन्हित मकानों पर कार्रवाई में जुट गईं।
कार्रवाई का ग्रामीणों ने विरोध किया। पुलिस की घेराबंदी तोड़ने की कोशिश के दौरान ग्रामीणों और पुलिस के बीच धक्कामुक्की भी हुई। तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए गांव और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था, बैरिकेडिंग और निगरानी बढ़ा दी गई है।
प्रशासन ने अभियान को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए गांव को अलग-अलग सेक्टरों में बांटा है। प्रत्येक सेक्टर में राजस्व, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की अलग-अलग टीम तैनात की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई राजस्व अभिलेखों और पूर्व में जारी नोटिस के आधार पर की जा रही है।
करीब ढाई हजार की आबादी वाले नकटी गांव में इस कार्रवाई से 85 परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले 40 से 50 वर्षों से इस जमीन पर रह रहे हैं। रविवार को गांव के सैकड़ों लोगों ने पीपल के पेड़ के नीचे बैठक कर शासन के फैसले का विरोध किया था।
ग्रामीणों ने हाल ही में सांसद बृजमोहन अग्रवाल से भी मुलाकात की थी। सांसद ने उन्हें आश्वस्त किया था कि किसी को बेघर करना सरकार की प्राथमिकता नहीं है और इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से चर्चा कर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
गौरतलब है कि शासन की योजना इस क्षेत्र में करीब 55 एकड़ भूमि पर विधायक आवासीय कॉलोनी विकसित करने की है। पिछले वर्ष भी इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन चला था, जो प्रशासन के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ था।