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नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में उस समय राजनीतिक हंगामा देखने को मिला, जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बागी सांसदों की मौजूदगी पर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताते हुए वॉकआउट कर दिया। हालांकि, कुछ देर बाद विपक्षी नेता वापस लौट आए और इसे एक 'प्रतीकात्मक विरोध' बताया।
बैठक के दौरान टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि जब इन बागी सांसदों की अयोग्यता याचिकाएं लंबित हैं और उनके विलय को मंजूरी नहीं मिली है, तो सरकार उन्हें आधिकारिक मान्यता कैसे दे सकती है?
दूसरी ओर, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मान्यता और अलग सीटों के लिए औपचारिक याचिका दायर की है, इसलिए इन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस, टीएमसी, सपा, द्रमुक, झामुमो, आप, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दलों और शिवसेना (उद्धव गुट) समेत कई प्रमुख विपक्षी दलों ने इस बैठक से वॉकआउट किया था।
मानसून सत्र की अवधि और मुख्य एजेंडा
सत्र की तारीखें: संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा।
पीएम का संबोधन: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को मानसून सत्र की शुरुआत से पहले सुबह 10:15 बजे संसद भवन के हंस द्वार पर मीडिया से रूबरू हो सकते हैं।
सत्र के दौरान पेश होंगे 3 प्रमुख बिल
सरकार ने मानसून सत्र के लिए तीन प्रमुख आर्थिक और विधिक विधेयकों को सूचीबद्व किया है:
1. आयकर (संशोधन) विधेयक: यह बॉन्ड बाजार और विदेशी निवेश को मजबूती प्रदान करेगा।
2. एमएसएमई (संशोधन) बिल: इसका उद्देश्य व्यापार को सरल बनाना और विवाद निपटान प्रक्रिया में सुधार करना है।
3. विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन बिल: यह विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों में बदलाव करेगा।
विपक्ष ने आगामी मानसून सत्र के दौरान सरकार को घेरने के लिए कई अहम मुद्दों पर चर्चा की मांग की है, जिनमें प्रमुख हैं:
राम मंदिर में चंदे की 'चोरी' का मामला
पेट्रोल में एथनॉल का मिश्रण
पेपर लीक की घटनाएं
मणिपुर की मौजूदा स्थिति