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नई दिल्ली। पेरिस सेंट-जर्मेन (PSG) ने शनिवार को बुडापेस्ट में खेले गए रोमांचक फाइनल मुकाबले में आर्सेनल को पेनाल्टी शूटआउट में 4-3 से हराकर चैंपियंस लीग का खिताब अपने नाम कर लिया। लेकिन फ्रांस की राजधानी पेरिस में इस ऐतिहासिक जीत का जश्न चंद घंटों में ही भीषण हिंसा, आगजनी और अराजकता में बदल गया। रविवार सुबह तक पूरे शहर से डराने वाली तस्वीरें सामने आईं, जहां 1 व्यक्ति की मौत हो चुकी है, 780 से अधिक उपद्रवियों को गिरफ्तार किया गया है और 264 से ज्यादा कारें आग के हवाले कर दी गईं।

मैच खत्म होने के बाद जहां एक तरफ एफिल टॉवर को पीएसजी के आधिकारिक रंगों (नीले और लाल) से रोशन किया गया, वहीं दूसरी तरफ शहर की सड़कों पर हालात बेकाबू हो गए। प्रसिद्ध शॉम्प्स-एलिसीज़ (Champs-Élysées) इलाके में करीब 20 हजार समर्थक जमा हो गए थे।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि उपद्रवियों ने सरेआम फ्लेयर जलाए, इलेक्ट्रिक बाइक में आग लगाई और दुकानों के शीशे तोड़ डाले। पुलिस के मुताबिक, पीएसजी के होम ग्राउंड 'पार्क दे प्रिंसेस स्टेडियम' के पास एक बेकरी और एक रेस्तरां में भी भारी तोड़फोड़ की गई।

मैच के दौरान स्टेडियम के बाहर 4,000 से 5,000 लोग मौजूद थे। समाचार एजेंसी एएफपी (AFP) के अनुसार, फुटबॉल समर्थकों के वेश में आए कुछ उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव और अन्य वस्तुएं फेंकी। पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि करीब 150 समर्थकों ने जबरन स्टेडियम के गेट नंबर-1 से अंदर घुसने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद सुरक्षाबलों ने उन्हें खदेड़ दिया।

संभावित हिंसा को देखते हुए फ्रांसीसी प्रशासन ने पूरे देश में 22 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की थी, जिनमें से 8 हजार केवल पेरिस में तैनात थे। एहतियात के तौर पर कई ट्राम और मेट्रो सेवाएं रोक दी गई थीं, फिर भी हिंसा को रोका नहीं जा सका।

फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने इस हिंसा को "पूरी तरह अस्वीकार्य" बताया है। उन्होंने जानकारी दी कि उपद्रवियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। इस झड़प में 7 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। रातभर चले सर्च ऑपरेशन में भारी मात्रा में फ्लेयर और आतिशबाजी सामग्री जब्त की गई है।

इस घटना के बाद फ्रांस में सियासत भी गरमा गई है। दक्षिणपंथी नेता और तीन बार राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार रह चुकीं मरीन ले पेन ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा “केवल फ्रांस में ही किसी फुटबॉल क्लब की जीत दंगों में बदल जाती है। जीत की रात लोगों को अपनी जान बचाने के लिए घरों में बंद रहने को मजबूर होना पड़ता है।”

इस भारी तनाव और हिंसा के बावजूद पीएसजी खिलाड़ियों की पूर्व निर्धारित विजय परेड (Victory Parade) रविवार को आयोजित की जाएगी। यह परेड एफिल टॉवर के पास शॉम्प-दे-मार्स क्षेत्र से गुजरेगी। इसके बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी टीम के सम्मान में एक विशेष समारोह की मेजबानी करेंगे।

दूसरी ओर, आर्सेनल के लिए यह हार किसी बड़े झटके से कम नहीं थी। क्लब लगभग दो दशक (20 साल) बाद पहली बार चैंपियंस लीग के फाइनल में पहुंचा था, लेकिन पेनाल्टी शूटआउट की नर्वस नाइंटीज में खिताब से चूक गया।

आपको बता दें कि पेरिस में फुटबॉल जीत के बाद हिंसा का यह पहला मामला नहीं है। पिछले वर्ष भी पीएसजी की जीत के बाद हुए दंगों में दो समर्थकों की मौत हुई थी। वहीं, साल 2009 में बार्सिलोना की जीत के बाद भी समर्थकों और दंगा-रोधी पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं।